summer express, गुरुग्राम। रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के विपरीत चल रही कमर्शियल गतिविधियों पर अब कार्रवाई तेज होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों का भू-उपयोग केवल रिहायशी गतिविधियों के लिए निर्धारित है, वहां व्यावसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकतीं। ऐसे मामलों में संबंधित परिसर को पहले सील करने की कार्रवाई की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश , लोगनाथन बनाम तमिलनाडु राज्य मामले की सुनवाई के दौरान दिए। इस मामले में हरियाणा सरकार और गुरुग्राम के विभिन्न विभाग भी पक्षकार हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई का आधार उसका स्वीकृत भू-उपयोग और सक्षम प्राधिकरण से मिली अनुमति होनी चाहिए।
निर्देश के अनुसार, यदि किसी क्षेत्र में केवल रिहायशी उपयोग की अनुमति है और वहां पीजी, गेस्ट हाउस, होटल या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती मिलती हैं तो संबंधित परिसर को सील किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद गुरुग्राम में रिहायशी संपत्तियों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई को और गति मिलने की संभावना है।
गुरुग्राम में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के डीटीपी एन्फोर्समेंट अमित मधोलिया की ओर से रिहायशी क्षेत्रों में नियमों के उल्लंघन के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। पिछले करीब दो महीनों में विभाग ने 150 इमारतों को सील किया है। इनमें 98 पीजी, गेस्ट हाउस और होटल शामिल हैं, जबकि 52 मकानों में अन्य प्रकार की कमर्शियल गतिविधियां संचालित पाई गई थीं।
विभाग की ओर से यह कार्रवाई मुख्य रूप से डीएलएफ फेज-3, डीएलएफ फेज-4, सुशांत लोक-1 और साउथ सिटी-1 में की गई है। अधिकारियों के अनुसार, डीएलएफ समेत 32 लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में नियमों के उल्लंघन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मास्टर प्लान या स्वीकृत योजना के अनुसार यदि किसी क्षेत्र का उपयोग केवल रिहायशी है तो वहां कमर्शियल गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती। कार्रवाई के दौरान संपत्ति के वास्तविक उपयोग के साथ उसके स्वीकृत भू-उपयोग और बिल्डिंग प्लान की भी जांच की जाएगी।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी संपत्ति से संबंधित विवाद अदालत में लंबित होने मात्र से कार्रवाई पर रोक नहीं लगती। यदि संपत्ति का इस्तेमाल उस उद्देश्य के विपरीत पाया जाता है, जिसके लिए जमीन आवंटित की गई थी या भवन का नक्शा स्वीकृत हुआ था, तो सक्षम प्राधिकरण कानून के अनुसार सीलिंग की कार्रवाई कर सकता है।
इसके अलावा, जिन निर्माणों के लिए किसी सक्षम प्राधिकरण से कोई मंजूरी नहीं ली गई है, उनके खिलाफ कानून के तहत सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।