Summer express, बलिंदर कुमार, कैथल। हरियाणा सरकार किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत पराली नहीं जलाने और एक्स-सीटू व इन-सीटू विधियों से फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। कृषि विभाग की ओर से किसानों को योजना के प्रति जागरूक करने के साथ पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।
चीका सब-डिवीजन की कृषि विभाग की एसडीओ कंचन शर्मा ने बताया कि गठित टीमों को अलग-अलग गांवों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन टीमों का काम किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देना और अपने निर्धारित क्षेत्रों में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी करना है। विभाग का प्रयास है कि किसान पराली जलाने के बजाय पर्यावरण और मिट्टी के स्वास्थ्य के अनुकूल विकल्प अपनाएं।
कंचन शर्मा ने बताया कि एक्स-सीटू विधि के तहत पराली की गांठें बनाकर उसका उपयोग किया जा सकता है, जबकि इन-सीटू विधि में सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, रोटावेटर और हैरो जैसे कृषि यंत्रों की सहायता से फसल अवशेषों को खेत की मिट्टी में मिलाया जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और उसके स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। किसानों को इन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि पराली जलाने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से दी जाने वाली 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि का लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए गांवों में जागरूकता गतिविधियां चलाई जा रही हैं। विभागीय टीमें किसानों को योजना की शर्तों, लाभों और फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्पों के बारे में जानकारी दे रही हैं।
एसडीओ के अनुसार, चीका सब-डिवीजन में पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। वर्ष 2024 के आंकड़ों के अनुसार, क्षेत्र में पराली जलाने की करीब 90 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जबकि वर्ष 2025 में इनकी संख्या घटकर 12 रह गई। कृषि विभाग ने वर्ष 2026 में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ स्कूलों में भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। विद्यार्थियों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान बताए जा रहे हैं, ताकि वे अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को भी फसल अवशेष न जलाने के लिए प्रेरित कर सकें। कृषि विभाग का मानना है कि किसानों और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी से खेतों की उर्वरता सुरक्षित रखने के साथ पर्यावरण प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है।