Summer express/चिंतपूर्णी, विकास -:मां भगवती के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास की एक भावुक कर देने वाली मिसाल सामने आई है। पंजाब के होशियारपुर जिले के चौहाल की रहने वाली अमनदीप अपने भाई के स्वस्थ होने पर मां चिंतपूर्णी के दरबार में शीश नवाने के लिए करीब 50 किलोमीटर की दंडवत यात्रा कर रही हैं। उनकी यह कठिन यात्रा आस्था, संकल्प और परिवार के प्रति प्रेम की अनूठी कहानी बयां कर रही है।
जानकारी के अनुसार, अमनदीप के भाई का सड़क हादसे में गंभीर चोटें आने के कारण स्वास्थ्य बिगड़ गया था। इस मुश्किल घड़ी में परिवार के सदस्य काफी परेशान थे और भाई की सलामती को लेकर चिंतित थे। परिवार पर आए इस संकट के बीच अमनदीप ने मां चिंतपूर्णी के दरबार में अरदास करते हुए अपने भाई के जल्द स्वस्थ होने की मन्नत मांगी थी। उन्होंने मन में संकल्प लिया था कि भाई के ठीक होने पर वह मां के दरबार में पहुंचकर अपनी मन्नत पूरी करेंगी।भाई की सेहत में सुधार होने के बाद अब अमनदीप अपने उसी संकल्प को पूरा करने के लिए चौहाल से मां चिंतपूर्णी मंदिर तक दंडवत यात्रा कर रही हैं। करीब 50 किलोमीटर का यह सफर आसान नहीं है। दंडवत यात्रा में श्रद्धालु जमीन पर लेटकर प्रणाम करते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, जिसके लिए शारीरिक सहनशक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है।अमनदीप की इस यात्रा को देखने वाले लोग उनकी श्रद्धा और हौसले की सराहना कर रहे हैं। उनके लिए यह यात्रा महज एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि कठिन समय में मां से की गई प्रार्थना के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम है।मां चिंतपूर्णी के दरबार में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं। अमनदीप की यह दंडवत यात्रा भी आस्था और विश्वास की ऐसी ही प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है, जिसमें एक बहन का अपने भाई के प्रति प्रेम और मां भगवती के प्रति श्रद्धा स्पष्ट झलकती है।