नई दिल्ली | नाटो महासचिव मार्क रुट द्वारा रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर द्वितीयक प्रतिबंधों की धमकी दिए जाने के बाद भारत ने कड़ा और साफ संदेश दिया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा खरीद पूरी तरह से देश के हित और वैश्विक बाजार की स्थितियों पर आधारित है और इस मुद्दे पर किसी भी तरह के दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
विदेश मंत्रालय ने दिया तीखा जवाब
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करना है। उन्होंने कहा कि भारत अपने फैसले वैश्विक हालात और बाजार की हकीकत को देखते हुए लेता है, न कि किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण। “हम किसी की धमकी से न डरते हैं, न हमारी नीति उससे बदलती है,” प्रवक्ता ने कहा।
रुट और ट्रंप की चेतावनियों पर भारत की प्रतिक्रिया
नाटो महासचिव रुट ने हाल ही में भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों को रूस से व्यापार खत्म करने की खुली चेतावनी दी थी, जबकि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस से संबंध बनाए रखने वाले देशों पर सौ फीसदी टैरिफ और प्रतिबंध की बात कर चुके हैं।
ब्रिक्स देश अपने रुख पर कायम
भारत, चीन और ब्राजील – तीनों देश ब्रिक्स का हिस्सा हैं और यूक्रेन युद्ध के बावजूद रूस से तेल और गैस जैसी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रहे हैं। भारत ने दो टूक कहा है कि वह एक स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता है और बाहरी दबाव से उसकी रणनीति प्रभावित नहीं होगी।