इस्तांबुल | तुर्की में राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और इस्तांबुल के लोकप्रिय मेयर एकरेम इमामोग्लू को अदालत ने 20 महीने की जेल की सजा सुनाई है। आरोप? एक सरकारी वकील के खिलाफ “अपमानजनक” टिप्पणी।
लेकिन मामला सिर्फ अपमान तक सीमित नहीं है—इस फैसले के पीछे जो सियासी गणित और सत्ता संतुलन छिपा है, वो पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। आलोचकों का मानना है कि यह सजा केवल एक “कानूनी कार्यवाही” नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
किस बात पर मिली सजा?
इमामोग्लू पर आरोप है कि उन्होंने एक सरकारी अभियोजक के खिलाफ बयान दिया था जिसे अदालत ने “अपमानजनक और धमकी भरा” माना। इसी के चलते उन्हें दो धाराओं में कुल मिलाकर 20 महीने की सजा सुनाई गई है। हालांकि उन्हें अभी पद से हटाने का आदेश नहीं दिया गया है।
क्यों है यह मामला इतना बड़ा?
इमामोग्लू को 2028 के चुनावों में एर्दोगन का सबसे मजबूत विरोधी माना जा रहा था। 2019 में उन्होंने इस्तांबुल मेयर का चुनाव जीतकर साबित किया कि विपक्ष की पकड़ मजबूत हो रही है। अब ऐसे समय पर उनकी सजा ने तुर्की की राजनीति में भूचाल ला दिया है।
🇹🇷 देशभर में विरोध प्रदर्शन
इस फैसले के बाद तुर्की के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस्तांबुल, अंकारा और अन्य शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। दर्जनों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है। यह हालात 2013 के गेज़ी पार्क आंदोलन की याद दिला रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय आलोचना भी तेज
यूरोपीय यूनियन और कई मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि तुर्की में न्यायपालिका स्वतंत्र नहीं रह गई है और यह फैसला सत्ता के दवाब में लिया गया है।