Summer express/बिलासपुर, सुभाष-: खेती की बढ़ती लागत और जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान के कारण कई किसान कृषि से दूरी बना रहे हैं। वहीं, ग्राम पंचायत कुठेड़ा मरहाणा के गांव कुठेड़ा निवासी किशोर कुमार ने अपनी मेहनत और नई सोच से खेती को आमदनी का बेहतर जरिया बनाने की मिसाल पेश की है। उन्होंने रासायनिक खाद का इस्तेमाल छोड़कर प्राकृतिक खेती को अपनाया है। आज वह पांच बीघा भूमि पर विभिन्न फसलों की पैदावार कर हर सीजन करीब 80 हजार रुपये की कमाई कर रहे हैं।
छह वर्षों से प्राकृतिक खेती पर दे रहे जोर
किशोर कुमार ने लगभग छह साल पहले रासायनिक खाद से दूरी बनाकर प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी खेती के तौर-तरीकों में बदलाव किया और कम लागत में बेहतर आमदनी देने वाली फसलों पर ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में वह अपनी जमीन पर दालों के अलावा हल्दी और अदरक की खेती कर रहे हैं। इन फसलों ने उनकी आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
जंगली जानवरों से नुकसान की चुनौती
पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों और अन्य जंगली जानवरों से फसलों को बचाना किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। कई बार मेहनत और खर्च करने के बावजूद किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। किशोर कुमार के अनुसार, उनके द्वारा अपनाई गई प्राकृतिक खेती की पद्धति से फसलों को होने वाले नुकसान की समस्या में राहत मिली है। इससे उन्हें खेती जारी रखने का प्रोत्साहन मिला है।
किसानों को दिखाई नई राह
किशोर कुमार का मानना है कि खेती में सफलता के लिए बदलते हालात के अनुसार फसल चयन और खेती के तरीकों पर ध्यान देना जरूरी है। उनकी पहल उन किसानों के लिए प्रेरणादायक है, जो बढ़ती लागत और नुकसान के चलते खेती छोड़ने के बारे में सोच रहे हैं।उनका अनुभव बताता है कि उपलब्ध जमीन और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करके खेती को आमदनी का साधन बनाया जा सकता है। हालांकि, प्राकृतिक खेती अपनाने से पहले स्थानीय मिट्टी, जलवायु, बाजार और फसलों की मांग को समझना भी जरूरी है।किशोर कुमार की यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती की संभावनाएं तलाशने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए नए विकल्प अपनाने की प्रेरणा दे सकती है।