Summer express, राकेश कुमार शर्मा, करनाल। साइबर ठगी की रकम को ठिकाने लगाने वाले गिरोह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करनाल साइबर थाना पुलिस ने उत्तर प्रदेश से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी कमीशन के लालच में साइबर ठगों को अपने बैंक खाते उपलब्ध करवाते थे। ठगी की रकम खातों में आने के बाद उसे निकालने या दूसरे खातों में स्थानांतरित करने का काम किया जाता था। इस मामले में 2.55 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई थी। पुलिस जांच में गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संपर्कों की बात भी सामने आई है। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, जबकि तीसरा आरोपी अभी फरार है।
साइबर थाना के जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर मुकेश कुमार के अनुसार, 16 अगस्त 2025 को एक शिकायतकर्ता के साथ एपीके एप के जरिए साइबर ठगी हुई थी। इस दौरान उसके बैंक खाते से 2 लाख 55 हजार रुपये निकाल लिए गए थे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और बैंक खातों में हुए लेन-देन की कड़ियों को जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश के दो आरोपियों तक पहुंच बनाई।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में हरदोई जिले के एक गांव का रहने वाला जिशान शामिल है। आरोप है कि उसने कमीशन के बदले अपना बैंक खाता साइबर ठगों को उपलब्ध करवाया था। ठगी की रकम खाते में पहुंचने के बाद उसे निकालने या आगे दूसरे खातों में भेजने का काम किया जाता था। दूसरा आरोपी संभल का रहने वाला शाहरुख है। जांच के दौरान साजिश नाम के एक अन्य युवक का नाम भी सामने आया है, जो कथित तौर पर आरोपियों के संपर्क में रहता था और ठगी के लिए बैंक खाते उपलब्ध करवाने में भूमिका निभाता था।
जांच अधिकारी के अनुसार, साइबर ठगी के इस नेटवर्क के तार विदेशों तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का दावा है कि गिरोह के मुख्य संचालक चीन, पाकिस्तान और कंबोडिया में बैठकर काम करते हैं। आरोपियों में से एक के संपर्क पाकिस्तान तक जुड़े होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इन अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और नेटवर्क में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि के लिए जांच जारी है। पुलिस ठगी की रकम के लेन-देन और उसके अलग-अलग बैंक खातों तक पहुंचने की कड़ियों की पड़ताल कर रही है।
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब फरार तीसरे आरोपी की तलाश में जुटी है। जांच अधिकारी मुकेश कुमार के मुताबिक, मामले में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, रकम के हस्तांतरण और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का प्रयास है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।