Summer express, कुरुक्षेत्र। हरियाणा में गन्ने के भाव को लेकर किसानों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से अगले दो वर्षों के लिए गन्ने का मूल्य निर्धारित किए जाने के बावजूद किसान संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं। भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) ने सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध की तैयारी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में 5 नवंबर को सुबह 11 बजे कुरुक्षेत्र में किसान संगठन की बैठक बुलाई गई है। इसमें गन्ने का उचित भाव दिलाने और सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन की आगामी रणनीति तय की जाएगी।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल और वर्ष 2027-28 के लिए 450 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। किसान संगठनों का कहना है कि खेती की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, लेकिन सरकार ने गन्ने के मूल्य में अपेक्षा के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं की है। इससे किसानों को फसल की लागत निकालने और उचित मुनाफा कमाने में परेशानी हो रही है।
भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रवक्ता राकेश बैंस ने कहा कि गन्ने के भाव में मात्र 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी किसानों के साथ अन्याय है। यूनियन की मांग है कि गन्ने का मूल्य कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। इससे कम भाव किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उचित मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान धीरे-धीरे गन्ने की खेती से दूरी बना रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में प्रदेश में गन्ने का रकबा और उत्पादन दोनों घट सकते हैं।
राकेश बैंस ने कहा कि सरकार एक ओर किसानों को गन्ने की खेती बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हें उत्पादन लागत के अनुसार उचित मूल्य नहीं मिल रहा। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने कहा कि सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन उनकी आमदनी में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई। इसके उलट खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। डीजल, कृषि दवाइयों, सिंचाई, खाद, मजदूरी और कृषि उपकरणों पर किसानों का खर्च बढ़ा है। ऐसे में गन्ने का मौजूदा भाव किसानों की मेहनत और लागत के अनुरूप नहीं है।
डॉ. लाठर के अनुसार, महंगाई बढ़ने के बावजूद किसानों को अपनी फसल का लाभकारी मूल्य हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं, चीनी उद्योग गन्ने से तैयार होने वाले अन्य उत्पादों से भी आर्थिक लाभ अर्जित कर रहा है।
गन्ने के भाव को लेकर बढ़ते विरोध के बीच 5 नवंबर को कुरुक्षेत्र में होने वाली बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें सरकार के फैसले पर चर्चा के साथ मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। अन्य किसान संगठनों को भी इस मुद्दे पर एकजुट करने की तैयारी है।