नई दिल्ली | इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह उछाल लंबे समय तक जारी रहा तो इससे देश की कई प्रमुख इंडस्ट्रीज़ को नुकसान झेलना पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव शुक्रवार को 7% बढ़कर 74.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कुछ समय के लिए यह 78.50 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिससे एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता का माहौल है।
भारत अपनी तेल की जरूरत का करीब 85% आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश की महंगाई दर, व्यापार घाटा और सरकारी सब्सिडी पर सीधा असर पड़ सकता है।
5 बड़े असर जो भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं
1. तेल और गैस के दामों में तेजी का खतरा
देश में कच्चा तेल निकालने वाली कंपनियां जैसे ONGC और ऑयल इंडिया अपनी उत्पादित तेल की कीमतें वैश्विक दरों के अनुरूप तय करती हैं। यदि सरकार ने कीमतों को कंट्रोल में रखने की कोशिश नहीं की तो इन कंपनियों की आय तो बढ़ सकती है, लेकिन आम उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ जाएगा।
2. महंगा हो सकता है हवाई सफर
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) कच्चे तेल से तैयार होता है और एयरलाइंस की लागत का बड़ा हिस्सा होता है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से एयरलाइन कंपनियां किराए में इजाफा कर सकती हैं, जिससे हवाई यात्रा महंगी हो सकती है।
3. पेंट कंपनियों की लागत में उछाल
एशियन पेंट्स, बर्जर पेंट्स और कंसाई नेरोलैक जैसी कंपनियां कच्चे तेल आधारित रॉ मैटेरियल जैसे सॉल्वैंट्स और रेजिन पर निर्भर करती हैं। कीमतों में बढ़ोतरी से इनकी लागत बढ़ेगी और रिटेल प्राइस में इजाफा हो सकता है, जिससे डिमांड घट सकती है।
4. पेट्रोकेमिकल और केमिकल कंपनियों पर दबाव
कच्चे तेल से तैयार होने वाले डेरिवेटिव जैसे नेफ्था, इथेन और प्रोपेन कई उत्पादों के लिए जरूरी होते हैं। अगर तेल के दाम ऊंचे रहे तो पिडिलाइट, आरती इंडस्ट्रीज, दीपक नाइट्राइट जैसी कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिससे मुनाफा घट सकता है।
5. सरकार पर बढ़ेगा सब्सिडी का बोझ
यूरिया और अमोनिया जैसे उर्वरक बनाने में प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का इस्तेमाल होता है। तेल की कीमतें बढ़ने से LNG की लागत भी बढ़ेगी, जिससे उत्पादन महंगा होगा और सरकार को सब्सिडी में अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
EV और ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियों को मिल सकता है फायदा
तेल की बढ़ती कीमतों के बीच जहां अधिकांश सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं, वहीं इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) बनाने वाली कंपनियां और तेल खोज (ऑयल एक्सप्लोरेशन) करने वाली कंपनियां लाभ में रह सकती हैं। हालांकि इसका लाभ भी नीति निर्धारण और बाज़ार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।