Summer express, नई दिल्ली | ईरान के लगभग 56 हजार करोड़ रुपये भारत में लंबे समय से फंसे हुए हैं, जिन्हें वह चाहकर भी वापस नहीं ले पा रहा है। यह रकम उस समय की है जब भारत ईरान से कच्चे तेल का आयात करता था और उसका भुगतान भारतीय बैंकों में जमा हो गया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण इसे ईरान को ट्रांसफर नहीं किया जा सका।
जानकारी के अनुसार, ईरान के कुल 100 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति विभिन्न देशों में फ्रीज पड़ी है। इनमें चीन, इराक, जापान, कतर, यूरोप और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन में करीब 20 अरब डॉलर, इराक में लगभग 6 अरब डॉलर, जापान में 1.5 अरब डॉलर और कतर में करीब 6 अरब डॉलर ईरान के फंसे हुए हैं। इसके अलावा यूरोप और अमेरिका में भी करीब 2 अरब डॉलर की संपत्ति अटकी हुई है।
भारत में यह रकम इसलिए फंसी क्योंकि 1979 की ईरानी क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच संबंध बिगड़ गए और इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लागू कर दिए। समय के साथ ये प्रतिबंध और सख्त होते गए, जिससे ईरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली का इस्तेमाल पूरी तरह से नहीं कर पा रहा है।
भारत का मामला भी इसी प्रतिबंध व्यवस्था से जुड़ा है। भारत ने ईरान से तेल खरीदा था और उसके भुगतान की राशि भारतीय बैंकिंग सिस्टम में जमा हो गई, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह पैसा सीधे ईरान को भेजा नहीं जा सका और यहीं अटका रह गया।
ईरान लगातार इस धनराशि को वापस पाने की मांग करता रहा है और इसे उसका वैध अधिकार बताता है, लेकिन अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका है कि यह पैसा ईरान के परमाणु या सैन्य कार्यक्रम में इस्तेमाल हो सकता है। इसी कारण इस मुद्दे पर कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है।
स्थिति यह है कि जब तक ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं होता और प्रतिबंधों में राहत नहीं मिलती, तब तक यह अरबों डॉलर की राशि फंसी रह सकती है। यह मामला केवल वित्तीय नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति और भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।