17 June,2025
वर्तमान डिजिटल युग में ईयरफोन युवाओं की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। चाहे म्यूजिक सुनना हो, ऑनलाइन क्लास लेना हो या फिर फोन पर बातचीत करना — हर गतिविधि में ईयरफोन का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग युवाओं की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
सुनने की शक्ति हो रही कमजोर
AIIMS के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संदीप सिंह का कहना है कि तेज़ आवाज़ में लंबे समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल करने से “हियरिंग लॉस” यानी सुनने की क्षमता में कमी आने का खतरा तेजी से बढ़ता है। उन्होंने बताया कि 90 डेसिबल से ऊपर की आवाज़ अगर एक घंटे से अधिक समय तक कानों में जाती है, तो यह कान के अंदर के नाज़ुक हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य भी हो रहा प्रभावित
न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ रहा है। मनोचिकित्सक डॉ. रश्मि मेहता के अनुसार, लगातार ईयरफोन लगाकर रहने से व्यक्ति सामाजिक रूप से अलग-थलग हो सकता है, और अवसाद, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा जैसी समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं।
युवाओं में बढ़ रहा ‘इयरफोन एडिक्शन’
स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्र अब बिना ईयरफोन के खुद को अधूरा महसूस करते हैं। सोशल मीडिया, गेमिंग और म्यूजिक के लिए घंटों तक ईयरफोन लगाए रहना एक लत बनता जा रहा है। कई माता-पिता ने शिकायत की है कि उनके बच्चे अब बात तक नहीं सुनते और हमेशा ‘प्लग-इन’ रहते हैं।
सावधानी ही बचाव है
विशेषज्ञों का सुझाव है कि
- ईयरफोन का उपयोग 60 मिनट से अधिक लगातार न करें।
- वॉल्यूम 60% से अधिक न रखें।
- ओवर-ईयर हेडफोन इन-ईयर फोन की तुलना में सुरक्षित हैं।
- हर घंटे 5-10 मिनट का ब्रेक ज़रूरी है।