23 June, 2025
श्रावण मास का आगमन होते ही मंदिरों में शिवभक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। लेकिन शिवभक्ति केवल सावन तक सीमित नहीं रहती — हर सोमवार, खास तौर पर ‘सोमवार व्रत’ के दिन, हजारों श्रद्धालु भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल चढ़ाते हैं। लेकिन आखिर क्यों शिवलिंग पर दूध अर्पित किया जाता है? और कैसे होता है शिव अभिषेक?
क्यों चढ़ाया जाता है दूध शिवलिंग पर?
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान शिव ‘नीलकंठ’ हैं — जिन्होंने समुद्र मंथन में निकला कालकूट विष पीकर संसार की रक्षा की थी। माना जाता है कि विष की गर्मी को शांत करने के लिए शिवलिंग पर शीतल जल और दूध अर्पित किया जाता है। दूध एक ठंडा और पवित्र तरल है, जिसे शिव की कृपा पाने का माध्यम माना गया है।
शिवलिंग पर जल-अभिषेक की विधि
प्रात:काल स्नान कर शुद्ध होकर, शिव मंदिर में जाकर सबसे पहले बेलपत्र, अक्षत (साबुत चावल), भस्म और जल लेकर शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। फिर शुद्ध कच्चा दूध चढ़ाया जाता है, जिसमें कभी-कभी केसर, शहद या गंगाजल भी मिलाया जाता है। इसके बाद फिर से जल चढ़ाकर शिवलिंग को शुद्ध किया जाता है।
श्रद्धालु “ॐ नमः शिवाय” का जाप करते हुए अभिषेक करते हैं, जिससे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है।
सोमवार — शिव का प्रिय दिन
‘सोम’ यानी चंद्रमा। चंद्रमा का संबंध मन से होता है, और भगवान शिव के सिर पर चंद्रमा विराजमान है। यही कारण है कि सोमवार को शिव के पूजन से मानसिक शांति और इच्छित फल की प्राप्ति होती है।शास्त्रों के अनुसार, सोमवार का व्रत करने वाले भक्तों को उत्तम स्वास्थ्य, सुख-संपत्ति और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर के लिए यह व्रत करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
बेलपत्र का महत्व
शिव पूजा में बेलपत्र का विशेष स्थान है। त्रिदल (तीन पत्तियों वाला) बेलपत्र त्रिगुण (सत्व, रज, तम) और त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का प्रतीक होता है। मान्यता है कि बेलपत्र चढ़ाने से शिव तुरंत प्रसन्न होते हैं।
शिवलिंग पर दूध और जल अर्पण केवल एक धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि आस्था, ऊर्जा और संतुलन का प्रतीक है। सोमवार को किया गया यह सरल सा अभिषेक भी जीवन को नई दिशा और शांति दे सकता है।