26 June, 2025
साल में कुल चार नवरात्रियां आती हैं—चैत्र, शारदीय और दो गुप्त नवरात्रि। इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि जहां पूरे देश में बड़े उत्साह से मनाई जाती हैं, वहीं गुप्त नवरात्रि साधना, तंत्र और विशेष देवी उपासना के लिए जानी जाती हैं। इनमें से एक गुप्त नवरात्रि आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में आती है।
इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 26 जून 2025, बुधवार से शुरू होकर 4 जुलाई 2025, शुक्रवार तक मनाई जाएगी।
🌸 घटस्थापना का शुभ मुहूर्त:
🔸 पहला मुहूर्त: प्रातः 04:44 बजे से 06:58 बजे तक
🔸 दूसरा मुहूर्त: प्रातः 09:16 बजे से 11:34 बजे तक
🔸 प्रतिपदा तिथि: 26 जून को दोपहर 01:24 बजे तक
🔸 सर्वार्थ सिद्धि योग: 26 जून सुबह 08:46 से 27 जून सुबह 05:31 तक
👉 सर्वार्थ सिद्धि योग को अत्यंत फलदायी और सिद्धि प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस दौरान की गई साधना विशेष फल देती है।
🌺 गुप्त नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व:
गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से तांत्रिक साधना, मंत्र सिद्धि, गायत्री जाप और आत्मिक जागरण के लिए उपयुक्त समय होता है। मान्यता है कि इस काल में की गई साधना अन्य नवरात्रियों की तुलना में सैकड़ों गुना अधिक फलदायक होती है।
🙏 पूजा विधि संक्षेप में:
- पूजा स्थान: घर की उत्तर-पूर्व, पूर्व-मध्य या उत्तर-मध्य दिशा चुनें।
- चौकी स्थापना: लाल या पीले कपड़े पर मां दुर्गा की प्रतिमा रखें।
- कलश स्थापना:
- कलश में शुद्ध जल, गंगाजल, बतासे, दूर्वा, हल्दी गांठ, सुपारी डालें।
- श्रीफल रखें, मौली लपेटें, आम/अशोक के 7 या 11 पत्ते लगाएं।
- अन्य देवताओं की स्थापना: गणेश जी, नवग्रह, कुलदेवी को चावल की ढेरियों पर विराजित करें।
- पूजन सामग्री: जल, रोली, अक्षत, लौंग, गूगल, फूल, माला, धूप, दीप, फल इत्यादि।
- नियमित आराधना:
- प्रतिदिन आरती, भोग अर्पण करें।
- दुर्गा सप्तशती पाठ और देवी मंत्र जाप करें।
- संभव हो तो 24,000 गायत्री मंत्र का जप करें।
- आसन व दिशा: कुशा या ऊन के आसन पर बैठें, मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।