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कज़ाकिस्तान में बुर्का पहनने पर पाबंदी, बढ़ी बहस: जानिए किन देशों में पहले से है रोक

नई दिल्ली | कज़ाकिस्तान में हाल ही में लागू किए गए बुर्का प्रतिबंध ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस को जन्म दे दिया है। सरकार के इस फैसले के तहत महिलाएं अब सार्वजनिक स्थानों पर चेहरे को पूरी तरह ढकने वाला बुर्का नहीं पहन सकेंगी। मुस्लिम बहुल देश होने के बावजूद इस तरह की पाबंदी कई सवाल खड़े कर रही है।

गौरतलब है कि कज़ाकिस्तान की लगभग 70% आबादी मुस्लिम समुदाय से है, जबकि शेष बड़ी आबादी ईसाई धर्म का पालन करती है।

क्या है बुर्का और कहां से शुरू हुई इसकी परंपरा?

‘बुर्का’ एक अरबी शब्द है, जिसका प्रयोग सातवीं सदी से हो रहा है। प्रारंभिक दौर में यह शब्द जानवरों को ठंड से बचाने के लिए उपयोग में आने वाले कपड़े के लिए इस्तेमाल होता था। ऐसा माना जाता है कि बुर्का पहनने की परंपरा ईरान से शुरू हुई थी। इस्लामी धार्मिक ग्रंथों में अधिकतर हिजाब शब्द का उल्लेख मिलता है, न कि बुर्का का।

कई मुस्लिम देश भी लगा चुके हैं प्रतिबंध

कज़ाकिस्तान ऐसा अकेला मुस्लिम बहुल देश नहीं है जिसने बुर्के पर रोक लगाई हो। कई अन्य मुस्लिम देशों ने भी इस पर सुरक्षा कारणों, सामाजिक समावेश या सांस्कृतिक दृष्टिकोण के आधार पर पाबंदी लगाई है। इनमें शामिल हैं:

  • ट्यूनीशिया
  • तुर्कमेनिस्तान
  • चाड
  • अल्जीरिया
  • ताजिकिस्तान
  • उज़्बेकिस्तान

इन देशों में सार्वजनिक सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी प्रयास और आधुनिकता को बढ़ावा देने जैसे कारणों से यह फैसले लिए गए हैं।

यूरोपीय देशों में बुर्का पर सख्त क़ानून और जुर्माना

यूरोप में भी बुर्के पर लंबे समय से विवाद होता रहा है। फ्रांस यूरोप का पहला देश था जिसने सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का और नकाब पहनने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया। इसके बाद बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, स्विट्ज़रलैंड, नीदरलैंड जैसे देशों ने भी इसी राह पर चलते हुए कानून बनाए।

इन देशों में प्रतिबंध के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कभी-कभी कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। यूरोपीय सरकारें इस फैसले को सांस्कृतिक समावेश और लैंगिक समानता के रूप में पेश करती हैं, हालांकि मुस्लिम समुदाय इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला मानता है।

भारत में भी बुर्का बना विवाद का विषय

भारत में भले ही राष्ट्रीय स्तर पर बुर्के पर कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन कई शैक्षणिक संस्थानों, परीक्षा केंद्रों और कुछ राज्यों में इसे लेकर विवाद और विरोध सामने आ चुके हैं।

Karuna

infosummerexpress@gmail.com

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