ऊना (हिमाचल प्रदेश) | गूगल मैप की दिशा ने एक परिवार को मौत के करीब पहुंचा दिया। हिमाचल से पंजाब जा रहे चार लोगों का एक परिवार जब मैप के बताए रास्ते पर चला, तो उनकी कार टूटा हुआ दभोटा पुल पार करते हुए अचानक उफनती नदी में समा गई। गनीमत रही कि स्थानीय लोगों की सतर्कता और तत्परता से सभी की जान बचा ली गई।
जानकारी के अनुसार, घटना शनिवार को ऊना जिले के दभोटा क्षेत्र में हुई। गूगल मैप पर भरोसा करते हुए एक कार सवार परिवार जब सतलुज नदी के किनारे पहुंचा, तो उस समय नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। पुल पहले से ही टूटा हुआ था, लेकिन मैप ने उसी रास्ते को नेविगेट कर दिया। जैसे ही कार नदी में उतरी, तेज बहाव ने उसे तिनके की तरह बहा दिया।
कार कई किलोमीटर तक पानी में बहती रही, लेकिन किस्मत से कुछ दूरी पर स्थानीय ग्रामीणों ने हादसे को देख लिया और त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि दभोटा पुल पिछले दो वर्षों से क्षतिग्रस्त है, लेकिन इसके बावजूद गूगल मैप अभी भी उसी रास्ते को दिखाता है। प्रशासन की ओर से पुल पर कोई स्पष्ट चेतावनी या अवरोधक चिन्ह भी नहीं लगाया गया है, जिससे यात्रियों को खतरे का अंदेशा हो सके।
इस घटना ने फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिर्फ डिजिटल दिशा-निर्देशों पर भरोसा करना सुरक्षित है? साथ ही, यह मामला संबंधित प्रशासन की लापरवाही और गूगल जैसी तकनीकी कंपनियों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जल्द से जल्द पुल की मरम्मत की जाए और गूगल मैप से इस खतरनाक रास्ते को हटाने की कार्रवाई की जाए।