चंडीगढ़ |पंजाब विधानसभा में सोमवार को धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी को लेकर पेश किए गए बिल पर अहम मोड़ आया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस विवादित मुद्दे पर सीधे फैसला लेने की बजाय सभी धर्मों, धार्मिक संगठनों और आम जनता से राय लेने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इस कानून का प्रभाव आने वाले कई दशकों तक रहेगा, ऐसे में इसे जल्दबाज़ी में पास नहीं किया जा सकता।
मुख्यमंत्री मान ने कहा, “हम श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को ज़िंदा गुरु मानते हैं। बीते वर्षों में हुई बेअदबी की घटनाओं ने हर धर्म के लोगों को आहत किया है। अब वक्त है कि ऐसा मजबूत कानून बने जिससे किसी को भी दोबारा इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न हो।”
अब यह बिल स्पीकर कुलतार सिंह संधवां द्वारा गठित सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाएगा। यह कमेटी अगले 6 महीनों में प्रदेशभर से सुझाव और प्रतिक्रियाएं लेकर रिपोर्ट तैयार करेगी।
मान ने सदन में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के अपमान और अन्य धार्मिक मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में दोषी 2-3 साल में बाहर आ जाते हैं और फिर उन्हें समाज में सम्मान मिलना शुरू हो जाता है। उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों को बाहर निकलने ही नहीं देना चाहिए।”
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण और प्रदूषण के मुद्दे को भी छुआ। उन्होंने कहा, “दशहरा-दीवाली पर पंजाब में इतने पटाखे फूटते हैं कि हवा में ऑक्सीजन नहीं, बल्कि गैस तैरती है।”
अब सभी की निगाहें इस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि पंजाब में पवित्र ग्रंथों की बेअदबी करने वालों के लिए कितना सख्त कानून बनेगा।