नई दिल्ली | कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने साफ किया कि 21 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में विपक्ष सरकार को पहलगाम आतंकी हमले, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में सैन्य अधिकारियों के खुलासे, चीन के साथ गतिरोध और डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता के दावों जैसे मुद्दों पर घेरने जा रहा है। रमेश ने कहा कि इन गंभीर विषयों पर कम से कम दो दिन की बहस अनिवार्य है और इस पर किसी तरह का समझौता संभव नहीं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ कांग्रेस नहीं, बल्कि पूरा INDIA गठबंधन इन मसलों पर सरकार से जवाब चाहता है। उनका आरोप है कि प्रधानमंत्री संसद में इन मुद्दों पर चुप्पी साधे रहते हैं, जबकि जनता को जवाब चाहिए। रमेश ने कहा कि संसद की कार्यवाही को सुचारू रखना सरकार की जिम्मेदारी है, विपक्ष की नहीं।
वोटबंदी बनाम नोटबंदी का आरोप
जयराम रमेश ने बिहार में मतदाता सूची के “विशेष पुनरीक्षण” को लोकतंत्र के खिलाफ साजिश करार दिया। उन्होंने इसे “वोटबंदी” की संज्ञा देते हुए आरोप लगाया कि लाखों दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और महिलाओं के नाम जानबूझकर हटाए जा रहे हैं। यह पूरी कार्रवाई केंद्र सरकार की “रणनीति” का हिस्सा है। रमेश ने चुनाव आयोग पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि वह सरकार के इशारों पर काम कर रहा है।
जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी उठेगा
रमेश ने कहा कि कांग्रेस जम्मू-कश्मीर को पुन: पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग उठाएगी। उन्होंने बताया कि इस बारे में खरगे और राहुल गांधी प्रधानमंत्री को पत्र लिख चुके हैं, जिसमें लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की बात भी कही गई है।
INDIA गठबंधन पर भरोसा, BJP पर तंज
INDIA गठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाने वालों को रमेश ने जवाब देते हुए कहा कि भाजपा को अपने भीतर झांकना चाहिए। उन्होंने भाजपा में नेतृत्व संकट और संगठन के अंदरूनी तनावों को लेकर भी कटाक्ष किया।