नई दिल्ली | सऊदी अरब के प्रिंस अल वलीद बिन खालिद बिन तलाल अल सऊद, जिन्हें ‘Sleeping Prince’ के नाम से जाना जाता था, अब इस दुनिया में नहीं रहे। 20 साल तक कोमा में रहने के बाद उनका निधन हो गया।
साल 2005 में महज 15 साल की उम्र में लंदन में हुए एक सड़क हादसे के बाद वह कोमा में चले गए थे और तब से कभी होश में नहीं आए। इन दो दशकों में अमेरिका, स्पेन और दुनिया के बड़े न्यूरोलॉजिस्ट ने इलाज की हर मुमकिन कोशिश की, लेकिन नतीजा नहीं बदला।
कभी-कभी हल्की आंखों की हरकत या कुरान सुनते हुए शरीर में थोड़ी प्रतिक्रिया दिखती थी, जिससे परिवार और समर्थकों को उम्मीद की एक किरण मिलती थी। लेकिन सबसे बड़ी मिसाल बने उनके पिता प्रिंस खालिद, जिन्होंने डॉक्टरों की सलाह को ठुकराते हुए बेटे को वेंटिलेटर से हटाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था—जीवन और मृत्यु का फैसला सिर्फ अल्लाह करता है।
हर दिन पिता बेटे के पास बैठते, कुरान की तिलावत करते और उसके लिए दुआ करते। इस अडिग विश्वास और प्रेम ने दुनियाभर के लोगों को छू लिया।
प्रिंस के निधन की खबर आते ही सोशल मीडिया पर #SleepingPrince ट्रेंड करने लगा। हज़ारों लोगों ने श्रद्धांजलि दी और उनके पिता के संघर्ष को सलाम किया। एक यूजर ने लिखा, “यह सिर्फ एक राजकुमार की नहीं, एक पिता के प्यार और उम्मीद की कहानी है।”