Shimla, Sanju
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद सुरेश कश्यप ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार एक संवैधानिक संस्था — राज्य निर्वाचन आयोग — को दबाने और उसके निर्णयों को प्रभावित करने का प्रयास कर रही है। कश्यप ने कहा कि कैबिनेट के माध्यम से आयोग के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप कर सरकार चुनावों को टालने की रणनीति अपना रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को आशंका है कि पंचायती राज एवं नगर निकाय चुनावों में उसकी नीतियों के कारण करारी हार हो सकती है, और इसीलिए चुनावों को लंबित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के पास जनसमर्थन की कमी के चलते अब संवैधानिक प्रक्रियाओं को बाधित करने का प्रयास हो रहा है।
निर्वाचन आयोग की चेतावनी की अनदेखी
सांसद कश्यप ने बताया कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 10 जुलाई 2025 को मुख्य सचिव को भेजे पत्र में स्पष्ट किया गया कि शहरी विकास विभाग को चुनाव या आरक्षण रोस्टर से संबंधित कोई निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243(P) और हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1994 की धाराओं 2(31) एवं 2(38) का हवाला देते हुए यह भी कहा कि यदि 2021 की जनगणना उपलब्ध नहीं है तो 2011 की जनगणना के आधार पर चुनाव कराए जाएं।
उन्होंने कहा कि आयोग ने शहरी विकास मंत्रालय को जारी पत्रों को तुरंत वापस लेने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन इसके बावजूद 22 जुलाई 2025 को शहरी विकास विभाग ने आयोग को पत्र लिखकर सूचित किया कि रोस्टर पर निर्णय 24 जुलाई को होने वाली कैबिनेट बैठक में लिया जाएगा।
कैबिनेट नहीं तय कर सकती संवैधानिक संस्थाओं का अधिकार क्षेत्र
कश्यप ने कहा कि रोस्टर और चुनाव कार्यक्रम तय करने का अधिकार केवल राज्य निर्वाचन आयोग के पास है और राज्य सरकार की यह कार्यवाही सीधे-सीधे संवैधानिक व्यवस्था के उल्लंघन की श्रेणी में आती है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार कैबिनेट की आड़ में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को बाधित करने का प्रयास कर रही है।