24 July, 2025
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में लोग अक्सर डाइनिंग टेबल और कुर्सियों को आरामदायक मानते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पुराने समय की आदत — जमीन पर बैठकर खाना खाना — न केवल पारंपरिक है, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है?
नीचे बैठकर, विशेषकर सुखासन की मुद्रा में खाना खाने से शरीर और मन दोनों को अनेक फायदे मिलते हैं। जानिए इसके प्रमुख लाभ:
- पाचन में सुधार:
सुखासन मुद्रा में बैठकर खाने से पेट की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं, जिससे पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है और गैस या अपच की समस्याएं कम होती हैं। - वजन घटाने में सहायक:
ज़मीन पर बैठने से शरीर की मुद्रा में स्वाभाविक सक्रियता आती है, जिससे अधिक कैलोरी खर्च होती है और धीरे-धीरे वजन नियंत्रित होने लगता है। - बेहतर रक्त संचार:
जब हम पैरों को क्रॉस करके बैठते हैं, तो यह मुद्रा शरीर के विभिन्न हिस्सों में रक्त प्रवाह को संतुलित करती है और हृदय के कार्य को बेहतर बनाती है। - जोड़ों और मांसपेशियों को राहत:
यह स्थिति शरीर की लचीलापन बढ़ाती है और कमर, घुटनों तथा कंधों के दर्द में आराम देती है। नियमित अभ्यास से जोड़ों की मजबूती में भी वृद्धि होती है। - मानसिक शांति और एकाग्रता:
जमीन पर बैठकर भोजन करना एक प्रकार का माइंडफुल ईटिंग है, जिससे मन शांत होता है और खाने पर ध्यान केंद्रित रहता है, जिससे ओवरईटिंग भी टलती है।
यह कोई संयोग नहीं है कि हमारे पूर्वज सदियों तक जमीन पर बैठकर खाना खाते थे। यह आदत न केवल शारीरिक रूप से लाभकारी है, बल्कि यह हमारे जीवन में अनुशासन, संतुलन और आध्यात्मिकता भी लाती है।
आज जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं, ऐसे में यह पारंपरिक तरीका एक बार फिर अपनाने योग्य है — स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन दोनों के लिए।