नई दिल्ली | साख रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने गुरुवार को भारत की क्रेडिट रेटिंग को ‘बीबीबी-‘ से ‘बीबीबी’ पर सुधार दिया है और स्थिर परिदृश्य जारी किया। यह 19 साल बाद भारत की रेटिंग में सबसे बड़ा सुधार है।
एसएंडपी ने अपने निर्णय का कारण बताते हुए कहा कि मजबूत आर्थिक वृद्धि, राजकोषीय मजबूती के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और महंगाई पर काबू पाने के लिए प्रभावी मौद्रिक नीतियां इसके पीछे हैं। एजेंसी ने कहा कि भारत अब दुनिया की सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और सरकारी खर्च की गुणवत्ता में पिछले पांच-छह साल में सुधार हुआ है।
एसएंडपी ने यह भी कहा कि भारत पर अमेरिकी शुल्क का असर सीमित रहेगा क्योंकि देश का लगभग 60 प्रतिशत आर्थिक विस्तार घरेलू खपत से आता है। इस सुधार से भारतीय कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कर्ज की लागत कम होगी।
पूर्व रेटिंग: जनवरी 2007 में भारत को ‘बीबीबी-‘ रेटिंग दी गई थी, जो सबसे निचले निवेश स्तर का संकेत थी। अब ‘बीबीबी’ रेटिंग यह दिखाती है कि भारत अपनी कर्ज देयताओं को आसानी से चुकाने में सक्षम है। एसएंडपी ने अल्पकालिक रेटिंग को भी ‘ए-3′ से ‘ए-2′ किया।
एसएंडपी ने भविष्य की संभावना पर भी जोर देते हुए कहा कि स्थिर नीतियां और उच्च निवेश, विशेषकर बुनियादी ढांचा क्षेत्र में, भारत की दीर्घकालीन वृद्धि को बढ़ावा देंगे। वित्त वर्ष 2025-26 में सामान्य सरकारी घाटा 7.3 प्रतिशत से घटकर 2028-29 तक 6.6 प्रतिशत होने का अनुमान है। एजेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की टिकाऊ वृद्धि और मजबूत निवेश संकेत को रेटिंग सुधार का मुख्य आधार बताया।