Shimla, 19 August
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र की शुरुआत विपक्ष के हमले के साथ हुई। पहले ही दिन नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नियम 67 के तहत चर्चा में सरकार को आपदा प्रबंधन को लेकर कठघरे में खड़ा किया।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार ने न केवल राहत कार्यों में देरी और लापरवाही बरती बल्कि जनता और बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा पहुंचाई गई राहत सामग्री को भी अपना बताने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा नाके लगवाकर लोगों को मजबूर किया गया कि राहत सामग्री सीधे एसडीएम को दी जाए।
दो करोड़ की मदद, हजारों करोड़ का नुकसान
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार कहती है कि आपदा से हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है, लेकिन मुख्यमंत्री ने अब तक केवल दो करोड़ रुपये की सहायता कई किस्तों में दी है। उन्होंने कहा –
“सवाल यह नहीं है कि कितनी मशीनें लगाई गईं, सवाल यह है कि कितनी मशीनें लगनी चाहिए थीं ताकि सड़कें समय पर खुल जातीं। डेढ़ महीने बाद भी कई सड़कें बंद पड़ी हैं।”
भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सत्ता से जुड़े नेताओं ने राहत कार्यों को अवसर बनाकर भ्रष्टाचार किया। जनता की मदद से खुले रास्तों पर भी कांग्रेस नेताओं ने टेंडर अपने नाम पर निकालने और पैसा हड़पने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता आपदा पीड़ितों की मदद नहीं बल्कि पूर्व सरकार द्वारा बनाए गए संस्थानों और ढांचों को हटाना रही है।
अस्थायी शेल्टर बनाने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि प्रभावितों के लिए अस्थायी शेल्टर बनाए जाएं और ठोस राहत योजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों ने इस कठिन समय में अच्छा काम किया है, जिसके लिए उन्हें साधुवाद दिया जाना चाहिए, लेकिन सरकार को उन जगहों पर सुधार की जरूरत है जहां लापरवाही और खींचतान साफ दिख रही है.