चंडीगढ़ | हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को बीपीएल कार्ड का मुद्दा जमकर गूंजा। विपक्ष ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले गरीबों को लुभाने के लिए बीपीएल लिस्ट में बड़े पैमाने पर नाम जोड़े गए, लेकिन नतीजों के बाद लाखों परिवारों को सूची से बाहर कर दिया गया।
कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला ने सदन में सवाल उठाते हुए पूछा कि जनवरी 2024 से जुलाई 2025 तक कितने नए बीपीएल कार्ड बनाए गए और कितने काटे गए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि परिवारों को सूची से बाहर करने का आधार क्या रहा।
जवाब में विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि इस अवधि में 8,73,507 नए परिवारों को बीपीएल श्रेणी में जोड़ा गया, जबकि 9,68,506 परिवारों को बाहर कर दिया गया। 31 मार्च 2025 तक राज्य में बीपीएल परिवारों की संख्या 52 लाख 37 हजार 671 थी, जो 22 अगस्त तक घटकर 41 लाख 93 हजार 669 रह गई।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने गुपचुप सर्वे कराकर गरीबों को योजनाओं से वंचित कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि विपक्ष ने चुनाव के दौरान बीपीएल का मुद्दा उठाकर जनता को गुमराह किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की है। पोर्टल पर परिवारों ने खुद अपनी आय घोषित की और जिनकी सालाना आय 1.80 लाख रुपये से अधिक थी, वे स्वेच्छा से बीपीएल सूची से बाहर हो गए।