काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान शासन ने देशभर में इंटरनेट और टेलीकॉम सेवाओं को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है, जिससे लगभग 43 मिलियन (4.3 करोड़) नागरिक बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गए हैं। ग्लोबल इंटरनेट निगरानी संस्था NetBlocks के अनुसार, सोमवार को देश की कनेक्टिविटी सामान्य स्तर के केवल 1% से भी कम रह गई।
कनेक्टिविटी ब्लैकआउट और असर
यह अचानक किया गया ब्लैकआउट पहले से चल रहे छोटे प्रतिबंधों के बाद आया है। इस महीने की शुरुआत में तालिबान ने कई प्रांतों में फाइबर ऑप्टिक कनेक्शन काटना शुरू कर दिया था, जिससे हाई-स्पीड इंटरनेट प्रभावित हुआ। बल्ख प्रांत के प्रवक्ता अत्ता उल्लाह जईद ने कहा कि यह कदम “बुराई रोकने के लिए” उठाया गया है और वैकल्पिक विकल्प लागू किए जाएंगे, हालांकि कोई और संचार प्रणाली मौजूद नहीं है।
इस ब्लैकआउट से अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था और आवश्यक सेवाओं पर गंभीर असर पड़ा है। देश का 9,350 किलोमीटर लंबा फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क ठप हो गया, बैंकिंग सिस्टम, सीमा शुल्क, व्यापार नेटवर्क और अन्य ऑनलाइन सेवाएँ प्रभावित हुईं। स्थानीय मीडिया के अनुसार काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से कम से कम 8 उड़ानें रद्द या बाधित हुईं। मोबाइल इंटरनेट और सैटेलाइट टीवी सेवाएँ भी ठप पड़ी हैं।
महिलाओं पर बढ़ते प्रतिबंध
तालिबान ने अगस्त 2021 में सत्ता में आने के बाद से महिलाओं और समाज पर कई पाबंदियाँ लगाई हैं। हाल ही में विश्वविद्यालयों से महिलाओं द्वारा लिखी किताबें हटाई गईं और 12 साल की उम्र के बाद लड़कियों की पढ़ाई पर रोक लगा दी गई।
विमेन फॉर अफगान विमेन (WAW) की सबेना चौधरी ने कहा कि यह ब्लैकआउट लाखों अफगानों को खामोश कर रहा है और उन्हें वैश्विक दुनिया से पूरी तरह अलग कर रहा है।