3 October, 2025
आजकल वजन घटाने और फिटनेस के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) का चलन तेजी से बढ़ा है। कई लोग 16:8, 14:10 या फिर 24 घंटे तक का उपवास अपनाते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा उपवास शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुकसान भी दे सकता है, खासकर महिलाओं में।
हार्मोनल असंतुलन का खतरा
लंबे समय तक या बार-बार फास्टिंग करने से शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ सकता है।
- महिलाओं में इसका असर मासिक धर्म की नियमितता पर पड़ सकता है।
- लंबे समय तक यह फर्टिलिटी (प्रजनन क्षमता) और ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है।
- हार्मोनल बदलाव से मूड स्विंग्स, थकान और नींद की समस्या भी हो सकती है।
- दिल और ब्लड शुगर पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह में 2 दिन से ज्यादा लंबे समय तक फास्टिंग करने से
- अतालता (Arrhythmia) यानी दिल की धड़कन में गड़बड़ी,
- और हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का बहुत कम होना) का खतरा बढ़ सकता है।
- पाचन तंत्र पर प्रभाव
जब शरीर को लगातार लंबे समय तक ऊर्जा नहीं मिलती, तो पाचन तंत्र धीमा होने लगता है।
- शुरुआत में शरीर अन्य स्रोतों (जैसे ग्लाइकोजन और वसा) से ऊर्जा लेता है।
- लेकिन लंबे उपवास से पोषक तत्वों की कमी और कमज़ोरी हो सकती है।
- सुरक्षित फास्टिंग कैसे करें
अगर आप फास्टिंग करना चाहती हैं, तो इसे संयम और सही तरीके से अपनाना ज़रूरी है:
- 16:8 या 14:10 पैटर्न ज़्यादातर महिलाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है।
- खाने के समय संतुलित आहार (प्रोटीन, फाइबर, हेल्दी फैट्स, विटामिन्स) लें।
- पर्याप्त पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें।
- अपने शरीर के संकेतों (थकान, चक्कर, मासिक धर्म की गड़बड़ी) को नज़रअंदाज़ न करें।
- ज़रूरत पड़ने पर डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह लें।
फास्टिंग अगर संतुलित रूप से की जाए तो यह शरीर के लिए फायदेमंद हो सकती है। लेकिन बहुत ज्यादा फास्टिंग महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन, मासिक धर्म की अनियमितता और प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इसलिए उपवास करते समय संयम, संतुलित आहार और शरीर की ज़रूरतों पर ध्यान देना बेहद आवश्यक है।