Shimla, Sanju
हिमाचल प्रदेश के ज़िला शिमला के रोहड़ू क्षेत्र में जातीय भेदभाव के चलते एक दलित बच्चे की आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) सड़कों पर उतर आई है।शिमला में विभिन्न दलित अधिकार संगठनों के साथ मिलकर माकपा ने धरना-प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
राकेश सिंघा बोले— 78 साल बाद भी जातीय अन्याय शर्मनाक
प्रदर्शन के दौरान माकपा नेताओं राकेश सिंघा और संजय चौहान ने कहा कि आज़ादी के 78 वर्ष बाद भी इस तरह की घटनाएं अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रोहड़ू में बच्चे के साथ जातिगत भेदभाव किया गया, जिसके चलते उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा।नेताओं ने यह भी कहा कि हाल ही में कुल्लू दशहरा में अनुसूचित जाति वर्ग से संबंध रखने वाले एक अधिकारी के साथ भीड़ द्वारा की गई बदसलूकी इस बात का प्रमाण है कि समाज में जातीय भेदभाव अब भी जड़ें जमाए हुए है।
दोषियों पर लगे SC-ST एक्ट
माकपा नेताओं ने कहा कि संविधान हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है, और इस तरह की घटनाएं उस भावना के खिलाफ हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि रोहड़ू प्रकरण में SC-ST एक्ट के तहत सख़्त कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।राकेश सिंघा ने कहा कि कुछ लोग बच्चे पर चोरी की आदत का आरोप लगा रहे हैं, जबकि पुलिस के पास इस संबंध में कोई एफआईआर दर्ज नहीं है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की मांग की।