चंडीगढ़,6 अक्टूबर
“अहिंसा, शांति और सर्वधर्म समभाव” के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुँचाने और विश्व एकता की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से गांधी ग्लोबल फैमिली (जीजीएफ), नेशनल यूथ प्रोजेक्ट (एनवाईपी) और संत निरंकारी मिशन (एसएनएम) के संयुक्त तत्वावधान में 2 से 7 अक्टूबर तक संत निरंकारी सत्संग भवन, असंध रोड, पानीपत में “वैश्विक युवा महोत्सव 2025” का सफल आयोजन किया गया।
इस सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत सहित विभिन्न देशों से आए लगभग 400 युवा प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम ने विचार-विमर्श, सांस्कृतिक संवाद और मानवता के वैश्विक संदेश के लिए एक जीवंत मंच का रूप ले लिया।प्रतिदिन सुबह से रात तक आयोजित कार्यक्रमों में योग सत्र, श्रमदान, संवाद श्रृंखला, भाषा कार्यशालाएँ और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ शामिल थीं। देश-विदेश से आए युवा कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को मूर्त रूप दिया। सभी प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क आवास और भोजन की व्यवस्था ने आयोजन को सुगठित और सुलभ बनाया।
3 अक्टूबर को हुए उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे गांधी ग्लोबल फैमिली के अध्यक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद। उनके साथ मंच पर संत निरंकारी मिशन के सचिव जोगिंदर सुखीजा और नेशनल यूथ प्रोजेक्ट के सचिव रण सिंह परमार भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों और समाजसेवियों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की महत्ता को और बढ़ाया।संत निरंकारी मिशन की ओर से राकेश मुटरेजा (मेंबर इंचार्ज, प्रैस एवं पब्लिसिटी विभाग) और हेमराज शर्मा (कॉर्डिनेटर, प्रचार विभाग) की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही। दोनों ने युवाओं को मिशन के सिद्धांत — “ईश्वर की एकता, मानव की एकता और धर्म का सार – प्रेम” — से परिचित कराया और बताया कि आध्यात्मिक समरसता और सेवा के माध्यम से विश्व में शांति और भाईचारे का प्रसार संभव है।
‘Oneness Talk’ श्रृंखला के तहत 3 और 4 अक्टूबर को हुए सत्रों में वैश्विक नागरिकता, मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक उत्तरदायित्व और गांधीवादी विचारधारा जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इन संवादों ने युवाओं को आत्मचिंतन, सामाजिक एकता और शांतिपूर्ण भविष्य के निर्माण के लिए प्रेरित किया।
महोत्सव के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे गांधी जी के आदर्शों को अपने जीवन का हिस्सा बनाकर समाज में शांति, सहयोग और सद्भाव के संवाहक बनेंगे। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि एक वैचारिक आंदोलन के रूप में उभरा जिसने नई पीढ़ी को गांधी दर्शन और मानवता के सार्वभौमिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।