हरियाणा | हरियाणा के एडीजीपी वाई पूरण कुमार की आत्महत्या मामले में नया खुलासा सामने आया है। मंगलवार को अपने चंडीगढ़ स्थित आवास के बेसमेंट में गोली मारकर आत्महत्या करने वाले अधिकारी का आठ पन्नों का फाइनल नोट (सुसाइड नोट) सामने आया है, जिसमें उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों पर जातीय भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं।
“वर्षों तक समान व्यवहार मांगा, पर मिला सिर्फ भेदभाव”
नोट में वाई पूरण कुमार ने लिखा— “मैंने हमेशा समान व्यवहार की मांग की, लेकिन मेरे साथ निरंतर भेदभाव और मानसिक उत्पीड़न हुआ। अब यह असहनीय हो गया है। उम्मीद है कि मेरी मौत के बाद सच्चाई सामने आए।”
उन्होंने बताया कि यह उत्पीड़न वर्ष 2020 में अंबाला के एक मंदिर में हुई घटना के बाद शुरू हुआ और समय के साथ बढ़ता गया। पूरण कुमार ने लिखा कि उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दी गईं, वाहन और आवास जैसी सुविधाओं से वंचित किया गया, और गोपनीय दस्तावेज़ों को मीडिया में लीक कर उनकी छवि धूमिल की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर आरोप
फाइनल नोट में उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों के नाम लेते हुए कहा कि उनके साथ सुनियोजित रूप से मानसिक प्रताड़ना की गई। आरोपितों में शामिल हैं:
- पूर्व डीजीपी मनोज यादव
- सेवानिवृत्त आईएएस टीवीएसएन प्रसाद
- डीजीपी शत्रुजीत सिंह कपूर
- एडीजीपी अमिताभ ढिल्लों
- एडीजीपी संजय कुमार
- आईजी पंकज नैन
- आईपीएस कला रामचंद्रन
- आईपीएस संदीप खिरवार
- आईपीएस सिबाश कबीराज
और अन्य वरिष्ठ अधिकारी।
उन्होंने लिखा कि इन सभी ने मिलकर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने और पेशेवर रूप से अलग-थलग करने की कोशिश की।
पूर्व डीजीपी मनोज यादव से शुरू हुआ विवाद
पूरण कुमार ने लिखा कि 2020 में अंबाला में मंदिर दर्शन के बाद पूर्व डीजीपी मनोज यादव उनके खिलाफ हो गए। इसके बाद उनके अधिकारों में कटौती की गई और उन्हें झूठे केसों में फंसाने की धमकियां दी गईं।
उन्होंने पूर्व गृह सचिव राजीव अरोड़ा पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने अर्जित अवकाश को मंजूरी नहीं दी, जिसके कारण पूरण कुमार अपने पिता के निधन से पहले उनसे नहीं मिल पाए। उन्होंने कहा कि यह दर्द उन्हें आज तक सताता है।
“शिकायतें अनसुनी रहीं”
नोट में उन्होंने लिखा कि उन्होंने सभी शिकायतें संबंधित अधिकारियों और गृह मंत्रालय को भेजीं, लेकिन किसी ने कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि जातिगत टिप्पणी, अनुचित ट्रांसफर और पक्षपाती रिपोर्टिंग जैसे मामलों से उन्हें बार-बार अपमानित किया गया।
उन्होंने डीजीपी शत्रुजीत कपूर पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक रवैया अपनाया, अप्रेजल रिपोर्ट में झूठी टिप्पणियां जोड़ीं, और आधिकारिक वाहन तक वापस ले लिया।
“परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं”
अपने अंतिम नोट में पूरण कुमार ने लिखा— “मैं अब अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूं। मैं चाहता हूं कि मेरे साथ जो हुआ, वैसा किसी ईमानदार अधिकारी के साथ न हो।”
आरोपों की सूची
- मनोज यादव (पूर्व डीजीपी): भेदभाव की शुरुआत करने का आरोप।
- राजीव अरोड़ा, टीवीएसएन प्रसाद, पीके अग्रवाल (पूर्व वरिष्ठ अधिकारी): भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप।
- शत्रुजीत कपूर (डीजीपी): प्रतिशोधात्मक कार्रवाई और जातिगत टिप्पणी के आरोप।
- अमिताभ ढिल्लों, संजय कुमार, पंकज नैन, कला रामचंद्रन: पक्षपातपूर्ण जांच और एकतरफा रिपोर्टिंग के आरोप।
- अनुराग रस्तोगी (एसीएस, गृह): शिकायतों को बिना सुनवाई बंद करने का आरोप।