नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया पाकिस्तान दौरे और खनिज सौदे के बाद सामने आई खबरों में कहा गया था कि अमेरिका पाकिस्तान को AIM-120 एडवांस्ड मीडियम‑रेंज एयर‑टू‑एयर मिसाइल (AMRAAM) की आपूर्ति करेगा। हालांकि, अमेरिकी दूतावास ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि पाकिस्तान को कोई नई मिसाइल नहीं दी जाएगी।
अमेरिकी दूतावास ने बताया कि हालिया रक्षा अनुबंध केवल पुराने समझौतों में तकनीकी सुधार, रखरखाव और स्पेयर‑पार्ट्स की आपूर्ति तक सीमित है। इसमें पाकिस्तान की वायु सेना की मौजूदा क्षमता बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है।
पाकिस्तानी मीडिया ने दावा किया था कि अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन के साथ लगभग $2.5 अरब के सौदे के तहत AIM-120 C8 और D3 वेरिएंट पाकिस्तान को मिलेंगे और इसकी डिलीवरी मई 2030 तक पूरी हो जाएगी। ये मिसाइलें F‑16 फाइटर जेट बेड़े की ताकत बढ़ा सकती थीं। लेकिन अमेरिकी रक्षा विभाग ने इसे पूरी तरह से गलत बताया।
AIM-120 AMRAAM अत्याधुनिक फायर‑एंड‑फॉरगेट एयर‑टू‑एयर मिसाइल है। इसमें सक्रिय रडार गाइडेंस सिस्टम है, जो इसे दिन या रात, किसी भी मौसम में प्रभावी बनाता है। यह लगभग 4,900 किमी/घंटा की गति से उड़ सकती है और एक साथ कई लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है।
अमेरिका ने बताया कि 30 सितंबर 2025 को जारी रक्षा विभाग की सूची में पाकिस्तान सहित अन्य देशों के पुराने समझौतों में तकनीकी बदलाव किए गए थे। इनमें केवल रखरखाव और स्पेयर‑पार्ट्स की आपूर्ति शामिल है, नई मिसाइल की बिक्री या पाकिस्तान की वायु शक्ति बढ़ाने का कोई संकेत नहीं है।
अमेरिकी दूतावास ने साफ किया कि पाकिस्तान को AIM-120 मिसाइल नहीं दी जाएगी और मीडिया में जो खबरें आईं, वे तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।