धर्मशाला, राहुल चावला
हिमाचल प्रदेश अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) तकनीक की मदद से डीप फेक ऑडियो और वीडियो की पहचान करेगा। साथ ही हैंडराइटिंग और सिग्नेचर आइडेंटिफिकेशन को भी ऑटोमेशन की दिशा में ले जाने की तैयारी है। इस दिशा में आईआईटी मंडी और हिमाचल प्रदेश के फारेंसिक विभाग संयुक्त रूप से अध्ययन करेंगे।
इस संबंध में फारेंसिक विभाग ने आईआईटी मंडी के सहयोग से एक प्रोजेक्ट प्रस्ताव केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन मंत्रालय को भेजा था, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।गौरतलब है कि देशभर से आए 400 प्रोजेक्ट प्रपोजल में से हिमाचल का प्रोजेक्ट देश में दूसरे स्थान पर चयनित हुआ है। इस प्रोजेक्ट के लिए डेढ़ करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि
यह प्रोजेक्ट वर्ष 2024 में सबमिट किया गया था, जिसे विशेष रूप से फारेंसिक एप्लीकेशन बेस्ड बनाया गया है ताकि राज्य में फारेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मज़बूत किया जा सके।केंद्र सरकार के मंत्रालय ने 400 प्रोजेक्ट्स की जांच के बाद केवल 4–5 प्रोजेक्ट्स को ही स्वीकृति दी है, जिनमें आईआईटी मंडी और फारेंसिक विभाग हिमाचल का प्रस्ताव नंबर दो पर है।इस प्रोजेक्ट में आईआईटी मंडी का मेजर शेयर रहेगा क्योंकि यह एक अकादमिक संस्थान आधारित अनुसंधान प्रोजेक्ट है। फारेंसिक विभाग इसमें एप्लीकेशन पार्टनर की भूमिका निभाएगा।
प्रोजेक्ट का उद्देश्य
इस अध्ययन के माध्यम से यह जांचा जाएगा कि एआई तकनीक फेक ऑडियो-वीडियो की पहचान में कितनी सटीक और उपयोगी साबित हो सकती है।वर्तमान में हैंडराइटिंग और सिग्नेचर की जांच मैन्युअल तरीकों से की जाती है, लेकिन इस प्रोजेक्ट के जरिये उसे ऑटोमेटेड एआई-बेस्ड सिस्टम में बदला जाएगा।इससे भविष्य में फारेंसिक जांच तेज़, सटीक और पारदर्शी बनने की दिशा में बड़ी मदद मिलेगी।