13 October, 2025
हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से सावन और सोमवार के दिन की जाती है। भक्तजन इस दिन भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र, दूध, दही, शहद और अलग-अलग रंगों के फूल अर्पित करते हैं। आमतौर पर सफेद और नीले रंग के फूल शिवजी को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं।लेकिन क्या आप जानते हैं कि केतकी का फूल, जिसे सुगंध और सौंदर्य के लिए जाना जाता है, भगवान शिव को अर्पित नहीं किया जाता? इसके पीछे एक प्राचीन और रोचक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है।
कथा के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी के बीच यह विवाद हुआ कि दोनों में सबसे महान कौन है। तभी वहां भगवान शिव एक विशाल अग्निस्तंभ के रूप में प्रकट हुए और कहा कि जो भी इस स्तंभ का अंत या आरंभ खोज लेगा, वही सबसे बड़ा माना जाएगा।विष्णु जी नीचे की दिशा में गए, जबकि ब्रह्मा जी ऊपर की ओर। बहुत खोजने के बाद भी कोई अंत नहीं मिला। लेकिन ब्रह्मा जी ने केतकी के फूल से झूठ कहलवाया कि उन्होंने शिवलिंग का शीर्ष देखा है।यह सुनकर भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने केतकी के फूल को श्राप दिया कि अबसे यह फूल कभी भी उनकी पूजा में उपयोग नहीं किया जाएगा।तभी से शिव भक्त केतकी के फूल को शिवलिंग पर नहीं चढ़ाते, जबकि अन्य सभी सुगंधित फूल, विशेष रूप से सफेद और नीले, शिवजी को अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।यह कथा न केवल एक धार्मिक परंपरा की व्याख्या करती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि सत्य का मार्ग ही सर्वोच्च है, और असत्य का कोई स्थान ईश्वर की उपासना में नहीं।