नई दिल्ली | पिछले कुछ समय से टाटा ग्रुप में विवाद और आंतरिक टकराव की खबरें चल रही थीं। लेकिन अब ऐसी जानकारी सामने आई है, जिससे समूह में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ गई है। टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकारी कार्यकाल को मंजूरी दे दी है, जो रिटायरमेंट पॉलिसी को दरकिनार करने वाला पहला मामला है।
चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में अपने दूसरे कार्यकाल को पूरा करने के समय 65 वर्ष के हो जाएंगे। समूह के नियमों के अनुसार, 65 वर्ष की आयु में अधिकारियों को कार्यकारी पदों से हटने की अपेक्षा होती है, हालांकि वे 70 वर्ष तक नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों पर बने रह सकते हैं।
अंतिम निर्णय किसे लेना है
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टाटा ग्रुप ने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी परियोजनाओं और एयर इंडिया जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के संचालन के लिए निरंतर कार्यकारी नेतृत्व जरूरी था। ट्रस्ट ने प्रस्ताव टाटा संस को भेजा है, जिसे फरवरी 2027 में तीसरे कार्यकाल को औपचारिक रूप देने से पहले अंतिम निर्णय लेना होगा।
टाटा ट्रस्ट की बैठक में मिली हरी झंडी
जानकारी के अनुसार, नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने 11 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक में चंद्रशेखरन के लिए पांच साल के तीसरे कार्यकाल का प्रस्ताव रखा। बैठक में इस प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। बैठक में यह भी ज़ोर दिया गया कि ग्रुप के बिजनेस ट्रांसफॉर्मेशन में निरंतरता बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
नियमों के अनुसार, नए कार्यकाल को समाप्त होने से एक साल पहले मंजूरी दी जाती है, और अगले साल फरवरी में टाटा ट्रस्ट्स इसे औपचारिक रूप से लागू करेंगे। ट्रस्ट्स की 66% हिस्सेदारी टाटा संस में है।
विवाद के बीच लिया गया निर्णय
चंद्रशेखरन का तीसरा कार्यकाल टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेदों के बीच आया है। कुछ ट्रस्टी इस बात पर पुनर्विचार कर रहे हैं कि टाटा संस को प्राइवेट ओनरशिप में ही बनाए रखना चाहिए।
फिर भी, चंद्रशेखरन का एग्जीक्यूटिव पद पर बने रहना ग्रुप के लिए जटिल दौर से निकलने और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पूरा करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।