Shimla,15 October
हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष कुलदीप कुमार धीमान ने रोहड़ू के लिंमड़ा गांव में नाबालिग बच्चे की संदिग्ध मौत के मामले में स्थानीय प्रशासन से रिपोर्ट तलब की। आयोग ने जांच में पुलिस की लापरवाही पर कड़ा संज्ञान लिया है।
अध्यक्ष ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पुलिस ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराओं को लागू नहीं किया, जिससे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हुई। इसी कारण जांच अधिकारी एएसआई मंजीत को निलंबित करने और एसडीपीओ रोहड़ू से स्पष्टीकरण मांगे जाने के निर्देश जारी किए गए हैं।आयोग ने यह भी निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, क्योंकि उन्हें संभावित खतरा बताया गया है।
धीमान ने कहा कि बच्चे के परिवार ने शिकायत में जातिगत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार के आरोप लगाए थे, परंतु पुलिस ने गंभीर धाराएं नहीं जोड़ीं। यह कार्रवाई तब हुई जब मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आया। बावजूद इसके, मुख्य आरोपित महिला की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।उन्होंने बताया कि आयोग इस प्रकरण की लगातार निगरानी कर रहा है। 1 अक्तूबर को आयोग ने तीन दिनों में रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन एसडीपीओ ने समय पर रिपोर्ट नहीं दी। बाद में 14 अक्तूबर को डीजीपी कार्यालय से रिपोर्ट प्राप्त हुई।
पीड़ित परिवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से 4 लाख 12 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई है।धीमान ने कहा कि अनुसूचित जाति आयोग का उद्देश्य समाज के वंचित तबकों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाना है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं इस मामले की प्रगति पर नजर रखे हुए हैं और उन्होंने आयोग को पीड़ित परिवार से मिलने व सहायता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।इस अवसर पर आयोग के सदस्य विजय डोगरा, दिग्विजय मल्होत्रा, एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) पंकज शर्मा, एसडीएम धर्मेश, एएसपी रतन नेगी, जिला कल्याण अधिकारी कपिल देव सहित पुलिस अधिकारी और पीड़ित परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।