Hamirpur, Arvind
जहां पूरे देश में दीपों का पर्व दीवाली हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है, वहीं हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले का सम्मू गांव आज भी इस पर्व से कोसों दूर है। इस गांव में सैकड़ों वर्षों से दीपावली नहीं मनाई जाती। ग्रामीणों का मानना है कि अगर किसी ने दिवाली मनाने की कोशिश की, तो गांव में आग लग जाती है या कोई अनहोनी घट जाती है। इसी डर के चलते आज भी लोग इस पर्व पर केवल दीप जलाते हैं, लेकिन घरों में पकवान या मिठाइयाँ नहीं बनाते।
हमीरपुर मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित सम्मू गांव में दीपावली पर सन्नाटा पसरा रहता है। ग्रामीण बताते हैं कि पहले विश्व युद्ध के समय गांव की एक गर्भवती महिला अपने सैनिक पति के शव के साथ सती हो गई थी। जाते-जाते उसने गांव को यह श्राप दिया कि “इस गांव में दीपावली कभी नहीं मनाई जाएगी।” तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
स्थानीय निवासी 75 वर्षीय रघुवीर सिंह रंगड़ा बताते हैं कि “जो भी परिवार दीपावली मनाने की कोशिश करता है, उसके बाद किसी न किसी की अकाल मृत्यु हो जाती है या आपदा आती है। इसलिए अब कोई भी जोखिम नहीं उठाता।”
महिला विद्या देवी कहती हैं, “जब बाकी जगह लोग दीप जलाते हैं, घर सजाते हैं, तब हमारे गांव में सन्नाटा रहता है। मन तो करता है दीपावली मनाने का, लेकिन डर भी लगता है।”वहीं ग्राम पंचायत प्रधान पूजा देवी का कहना है कि “सम्मू गांव में आज तक दीपावली का त्यौहार नहीं मनाया गया है। लोग केवल दीप जलाते हैं और सती माता की पूजा करते हैं। अब यह सवाल बना हुआ है कि क्या कभी यह गांव इस श्राप से मुक्त हो पाएगा।