Dharamshala, Rahul chawla
दीपावली का पर्व नज़दीक आते ही धर्मशाला और कांगड़ा के बाजारों में रौनक लौट आई है। इस बार उपभोक्ताओं की पसंद में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। जहाँ पहले चाइनीज़ लाइटें और सजावटी सामान बाजारों पर हावी रहते थे, वहीं इस बार स्वदेशी वस्तुएं, खासकर मिट्टी के दीये, कलश और पारंपरिक सजावटी सामग्री, लोगों की पहली पसंद बन गए हैं।
स्वदेशी उत्पादों से सजी दीपावली की रौनक
धर्मशाला सहित पूरे कांगड़ा जिले में मिट्टी के दीयों, खिलौनों और बर्तनों की बिक्री में भारी इज़ाफ़ा हुआ है। पर्यावरण और सेहत के प्रति जागरूक उपभोक्ता अब “मेड इन इंडिया” वस्तुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुकानदारों के मुताबिक, इस साल स्वदेशी उत्पादों की बिक्री में 40 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।
कारीगरों के चेहरे खिले – बढ़ी आमदनी की उम्मीद
धर्मशाला के बाजारों में दो रुपये से लेकर 150 रुपये तक के रंग-बिरंगे मिट्टी के दीपक बिक रहे हैं। स्थानीय कारीगर राजकुमार ने बताया कि “पहले मांग कम थी, लेकिन इस बार मिट्टी के दीयों की बिक्री कई गुना बढ़ी है।” एक अन्य कारोबारी आदित्य राजकुमार ने कहा, “ग्राहक अब स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे कारोबार में रौनक लौट आई है।”
‘वोकल फॉर लोकल’ की गूंज
खरीदारी कर रही मुस्कान नामक युवती ने बताया कि “वह मिट्टी के दीये इसलिए खरीद रही हैं क्योंकि ये पर्यावरण के अनुकूल हैं और इससे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।”बाजारों में मिट्टी के दीयों की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि लोग अब ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र को सच्चे अर्थों में अपनाने लगे हैं।