Hamirpur, Arvind
ग्राम पंचायत देई का नौण के गांव पनियाला का वीर सपूत सुशील कुमार अब पंचतत्व में विलीन हो गया। बुधवार को उनके पैतृक गांव में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। बेटे नक्ष राणा ने नम आंखों से अपने पिता को मुखाग्नि दी।
फैजाबाद में ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ने से जवान सुशील कुमार का सोमवार शाम को निधन हो गया था। सुबह चार बजे उन्हें चक्कर आने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। सुशील कुमार भारतीय सेना की 13 रेजीमेंट में नायक के पद पर तैनात थे।बुधवार को दोपहर करीब 12 बजे उनका पार्थिव शरीर लखनऊ से चंडीगढ़ विमान द्वारा और फिर एंबुलेंस से गांव पहुंचा। जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, “भारत माता की जय” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और माहौल गमगीन हो गया।सुशील कुमार के भाई तिलक ने बताया कि कुछ दिन पहले ही वह घर आए थे। परिवार में वे ही एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनके दो छोटे बच्चे हैं, और पत्नी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
इस मौके पर विधायक कैप्टन रणजीत सिंह, तहसीलदार तथा प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। नायब सूबेदार बलविंद्र सिंह ने बताया कि सुशील कुमार अपने कार्य के प्रति बेहद निष्ठावान और मेहनती जवान थे। उनका निधन सेना के लिए एक बड़ी क्षति है।विधायक कैप्टन रणजीत सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि सुशील कुमार के पिता भी 15 डोगरा रेजीमेंट से सेवानिवृत्त हुए थे। उन्होंने कहा कि सैनिक कभी नहीं मरता — वह सदा लोगों के दिलों में जीवित रहता है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।