24 October, 2025
देशभर में श्रद्धा और भक्ति का महापर्व छठ पूजा 2025 इस बार 25 अक्टूबर (शनिवार) से शुरू होकर 28 अक्टूबर (मंगलवार) तक मनाया जाएगा। चार दिनों तक चलने वाला यह पर्व सूर्य उपासना और मातृत्व शक्ति के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
भगवान राम से जुड़ी मानी जाती है छठ पूजा की शुरुआत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, छठ पूजा की शुरुआत भगवान श्रीराम के समय से हुई थी। कहा जाता है कि जब श्रीराम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे, तो उन्होंने और माता सीता ने सूर्य देव की आराधना की थी। दोनों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर व्रत आरंभ किया और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया। यही परंपरा आगे चलकर छठ पर्व के रूप में प्रसिद्ध हुई।
अर्घ्य देने का शुभ मुहूर्त
व्रती महिलाओं के लिए सूर्य अर्घ्य का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष प्रातःकालीन अर्घ्य का शुभ मुहूर्त 28 अक्टूबर (मंगलवार) को सुबह 5:33 बजे से 6:30 बजे तक रहेगा। इसी के साथ व्रती पारण कर व्रत का समापन करेंगी।
छठी मैया की उत्पत्ति और महिमा
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की, तो उन्होंने प्रकृति की भी रचना की। देवी प्रकृति ने स्वयं को छह भागों में विभाजित किया, जिनमें से छठा अंश छठी मैया कहलाया। इसीलिए उन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा जाता है।
पुराणों के अनुसार, छठी मैया के अर्धांग भगवान कार्तिकेय हैं — जो भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। इसीलिए छठ पर्व में सूर्य देव और छठी मैया दोनों की आराधना का विशेष महत्व होता है।
डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य
छठ पर्व में पहले डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाता है, और अगले दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होता है। यह अनुष्ठान त्याग, तपस्या और आस्था का अद्भुत उदाहरण माना जाता है, जो परिवार और समाज में सुख-समृद्धि का संदेश देता है.