Karnal, 26 October
हरियाणा के करनाल की अनाज मंडियों में इन दिनों धान खरीद पूरी तरह ठप पड़ी है। सरकारी एजेंसियों की देरी और गेट पास जारी न होने से मंडियां धान से लबालब हो चुकी हैं। किसान अपनी उपज ट्रालियों में पड़े-पड़े सड़ते देख बेबस हैं। कई जगहों पर ट्रॉलियों में धान काला पड़ने लगा है, जिससे किसानों की मेहनत मिट्टी में मिलती नजर आ रही है।
किसानों की बेबसी — “अब तो ₹10,000 में भी बेच देंगे बस उठान हो जाए”
मंडी में डाकवाला गांव के किसान सुरेंद्र ने कहा कि मेरी ट्रॉली में करीब 100 क्विंटल धान पड़ा है, अब काला पड़ने लगा है। गेट पास नहीं कट रहे, मंडी की व्यवस्था पूरी तरह ठप है। इतनी परेशानी में अब ₹10,000 मंदी में भी यह धान बेचने को तैयार हूं।वहीं किसान कर्मवीर ने कहा कि दिवाली के बाद से मंडी में छुट्टी पर छुट्टी चल रही है। हमारी फसल सड़ रही है और आज भी कोई गेट पास नहीं काट रहा। किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मंडी प्रशासन की सफाई — तीन एजेंसियां उठा रहीं हैं धान, अवकाश के बावजूद उठान जारी”
मंडी मार्केट के सह सचिव योगेश शर्मा ने कहा कि सरकार के निर्देशानुसार तीन एजेंसियां धान का उठान कर रही हैं। लेकिन उठान में देरी से मंडी भर गई है। इसी कारण दो दिन मंडी बंद रखी गई थी और किसानों से अपील की गई थी कि फिलहाल नई फसल मंडी में न लाएं। फिर भी कुछ किसान जल्दबाज़ी में फसल लेकर आ रहे हैं। रविवार के अवकाश के बावजूद हम उठान की व्यवस्था कर रहे हैं। किसी किसान को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
फिलहाल हालात जस के तस
मंडी के हालात फिलहाल सुधरते नहीं दिख रहे।
धान से भरी ट्रॉलियों की लंबी कतारें किसानों की मजबूरी और नाराज़गी दोनों बयां कर रही हैं। किसान इंतजार में हैं कि कब उठान शुरू हो और उनकी मेहनत की सही कीमत मिल सके। प्रशासन समाधान का भरोसा दे रहा है, लेकिन मंडियों में अफरातफरी और असंतोष दोनों जारी हैं।
सवाल अब भी कायम — कब मिलेगा मेहनत का दाम?
किसानों के मन में सवाल अब भी वही हैं —कब तक ट्रॉलियों में सड़ती रहेगी मेहनत की फसल?और कब मिलेगा हमें हमारे पसीने का सही दाम?