फिल्लौर । राजस्थान पुलिस ने एक बहु-राज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है जो सरकारी कल्याण पोर्टल्स और योजनाओं में सेंध लगाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर रहा था। अभियान में अब तक 30 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में नकदी, डिजिटल उपकरण, फर्जी खाते तथा अन्य साक्ष्य जब्त किए गए हैं।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तारी के दौरान आरोपियों के पास से 53 लाख रुपये नकद, नोट गिनने की मशीन, सैकड़ों चेकबुक और पासबुक, धोखाधड़ी में प्रयोग होने वाले हजारों एटीएम कार्ड, 35 लैपटॉप, 70 मोबाइल फोन तथा कई डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए। इसके अलावा लग्जरी कारें, दर्जनों दोपहिया वाहन और ट्रैक्टर भी पुलिस के हाथ लगे। गिरोह द्वारा उपयोग में लाई गई लगभग 11 हजार नकली बैंक खाता डिटेल भी बरामद हुई हैं।
जांच में पता चला है कि इस गिरोह के मुखिया और मुख्य तार पंजाब के जालंधर और फिल्लौर से जुड़े हुए थे। आज की बड़ी रेड कार्रवाई में फिल्लौर के गढ़ा गांव से रोहित कुमार तथा जालंधर से संदीप शर्मा और सुनंत शर्मा को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों को गिरोह का प्रमुख सरगना बताया है और कहा है कि संदीप शर्मा क्लोन वेबसाइट विकसित करने का काम करता था, जबकि सुनंत शर्मा मुख्य हैंडलर और वेबसाइट डेवलपर्स को जोड़ने का कर्तव्य निभाता था।
जालवाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार के निर्देशन में चलाए गए ऑपरेशन “शटरडाउन” के तहत यह चक्र उजागर हुआ। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि गिरोह ने केंद्र तथा राज्य सरकारों की कई जनकल्याणकारी योजनाओं की वेबसाइटों में अपने खातों और फर्जी यूजर अकाउंट बनाकर सरकारी खातों से धन निकाला। पुलिस ने बताया कि कुछ सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत भी इस ठगी में सामने आई है। गिरोह के पकड़े जाने के बाद अब तक बरामद 11 हजार से अधिक संदिग्ध बैंक खातों को तत्काल फ्रीज कराया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि आरोपियों के पास पीएम-किसान सम्मान निधि पोर्टल से जुड़ी गड़बड़ियां करने की मानक परिचालन प्रक्रियाओं (SOP) की ईमेल फाइलें भी मिली हैं। बरामद डेटा में लाभार्थियों के आईडी, बैंक अकाउंट नंबर, नाम, मोबाइल और आधार नंबर शामिल थे। प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक गुजरात के करीब 2 लाख, असम के करीब 40 हजार और राजस्थान के करीब 55 हजार लाभार्थियों के डाटा इस गिरोह के कब्जे में था। इसके अलावा लगभग 15 हजार आधार आईडी की सूचि भी बरामद हुई है।
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्यों ने ऐसे ग्रामीणों का डाटा भी इकट्ठा किया जिनके पंजीकरण लैंड सीडिंग या केवाईसी कारणों से निष्क्रिय हो चुके थे। इन लोगों को फिर से योजनाओं में जोड़ने का झांसा देकर उनके विवरण हासिल किए जाते और फिर धोखाधड़ी में प्रयुक्त किया जाता था। गिरोह का मास्टरमाइंड पहले नोडल ऑपरेटर के पास पहुंचकर अतिरिक्त आईडी बनवाने और पासवर्ड सहित इन्हें अपने साथी एजेंटों को भेजने का काम करता था। रात के समय इन आईडी से सरकारी पोर्टलों में लॉगिन कर लाभार्थियों के खाते बदले जाते तथा सुबह होते ही बनाई गई आईडीज डिएक्टिवेट कर दी जाती थीं ताकि अनियमितता का पता न चल सके।
जांच में तेजी के बाद अब कुछ आरोपित भूमिगत हो गए हैं। पुलिस ने उनके फोटो, नाम और पते सार्वजनिक कर उनके पकड़वाने वाले लोगों को उच्च इनाम देने की घोषणा की है। इनाम 25 हजार रुपये तक होगा और सूचना देने वाले का नाम गोपनीय रखा जाएगा।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों पर संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की विस्तृत जांच जारी है। राज्य और केंद्र स्तर की संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि फर्जी खातों और बरामद डाटा के जरिये हुए वित्तीय नुकसान का पूरा हिसाब सामने आ सके और दोषियों को सख्त न्याय दिलाया जाए।