नई दिल्ली I साल 2025 में सोने ने ऐसा ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया है जिसने दुनिया भर के निवेशकों को हैरान कर दिया है। जनवरी से अब तक सोने की कीमतों में 50% से अधिक की बढ़ोतरी हुई है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका भाव 4,000 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गया है — जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इस सुनहरी तेजी के बीच भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की नई रिपोर्ट ने एक दिलचस्प तस्वीर पेश की है — कीमतें रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई पर हैं, लेकिन घरेलू मांग गिर रही है।
RBI की सोने की होल्डिंग में नया रिकॉर्ड
SBI रिसर्च की रिपोर्ट “Coming of (A Turbulent) Age: The Great Global Gold Rush” के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव और कमज़ोर अमेरिकी डॉलर ने सोने को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस उछाल के चलते भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास मौजूद 880 टन सोने की वैल्यू वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 27 अरब डॉलर हो गई है, जो पिछले वित्त वर्ष के 25 अरब डॉलर से अधिक है।
ग्लोबल बूम, लेकिन भारत में मांग में गिरावट
जहां एक ओर दुनिया भर में सोने की कीमतें रिकॉर्ड बना रही हैं, वहीं भारत में उपभोक्ता भावना कमजोर हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, 2025 की तीसरी तिमाही में भारत की कुल सोने की मांग में 16% की गिरावट आई, जबकि ज्वेलरी सेल्स 31% घट गईं। इसके बावजूद, भारत अब भी चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोने का उपभोक्ता बना हुआ है।
घरेलू उत्पादन कम, इंपोर्ट पर निर्भरता बरकरार
रिपोर्ट बताती है कि भारत की कुल सोने की सप्लाई का 86% हिस्सा आयात से आता है। हालांकि ओडिशा, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में नए सोने के भंडार मिले हैं, फिर भी देश की विदेशी निर्भरता में खास कमी नहीं आई है। अप्रैल से सितंबर 2025 के बीच भारत ने $26.5 बिलियन (करीब ₹2.2 लाख करोड़) का सोना आयात किया, जो पिछले साल के $29 बिलियन से थोड़ा कम है।
रुपये और चालू खाते पर असर
SBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की यह भारी आयात निर्भरता रुपये और चालू खाते के घाटे (CAD) पर सीधा असर डालती है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें बढ़ती हैं, तो रुपया कमजोर पड़ता है और चालू खाता घाटा बढ़ता है।
चीन की गोल्ड स्ट्रैटेजी पर दुनिया की नज़र
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने हाल ही में एक राष्ट्रीय गोल्ड पॉलिसी (National Gold Policy) बनाई है, जिसका मकसद सिर्फ निवेश बढ़ाना नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सोना व्यापार और रिजर्व सिस्टम को दोबारा परिभाषित करना है। इस नीति ने चीन की आर्थिक और भू-राजनीतिक ताकत को और मजबूत किया है।
भारत की गोल्ड पॉलिसी पर SBI की टिप्पणी
SBI रिपोर्ट कहती है कि भारत की गोल्ड पॉलिसी दशकों से फिजिकल गोल्ड की खपत घटाने पर केंद्रित रही है। रिपोर्ट में कहा गया है —
“1978 से अब तक जब भी गोल्ड पॉलिसी पर चर्चा हुई, फोकस हमेशा लोगों को फिजिकल सोने से दूर कर वित्तीय विकल्पों, जैसे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की ओर ले जाने पर रहा। लेकिन ये कदम अक्सर अल्पकालिक प्रभाव ही डाल पाए हैं।”