पंजाब | पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के तहत 2005 से सेवाएँ दे रहे शिक्षकों को नियमित करने का रास्ता साफ़ कर दिया है। जस्टिस जगमोहन बांसल की एकल पीठ ने सात याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कहा कि ये शिक्षक “बैकडोर एंट्री” वाले कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि इनकी भर्ती विज्ञापन, लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, पुलिस और मेडिकल वेरिफिकेशन जैसी पूरी प्रक्रिया के तहत हुई थी।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इतने लंबे समय तक कॉन्ट्रैक्ट पर रखकर शिक्षकों का शोषण नहीं किया जा सकता।
केंद्र सरकार के तर्क को हाईकोर्ट ने ठुकराया
केंद्र सरकार ने दावा किया था कि 1375 SSA शिक्षकों को नियमित करना संभव नहीं है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के उमा देवी मामले के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को पक्का नहीं किया जा सकता।
लेकिन हाईकोर्ट ने यह तर्क स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि उमा देवी का फैसला केवल उन नियुक्तियों पर लागू होता है, जहाँ नियमों को दरकिनार करके पिछली प्रक्रिया अपनाई गई हो, जबकि SSA शिक्षकों की भर्ती पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई थी।
20 साल से सेवाएँ दे रहे शिक्षक, नियमित किए जाने के हकदार
अदालत ने कहा कि अधिकांश SSA शिक्षक 20 साल से अधिक समय से लगातार सरकारी स्कूलों में सेवाएँ दे रहे हैं और नियमित शिक्षकों की तरह ही काम कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार मौलिक अधिकारों का सम्मान करते हुए सालों तक अस्थायी रोजगार का दुरुपयोग नहीं कर सकती।
रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि चंडीगढ़ प्रशासन ने कई बार केंद्र सरकार को इन शिक्षकों को नियमित करने का प्रस्ताव भेजा, जिसमें 1130 पदों की मंज़ूरी भी मिल चुकी थी। बावजूद इसके, केंद्र ने 2021 में इसे खारिज कर दिया था, जिस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताई।
सभी SSA शिक्षकों पर समान रूप से लागू होगा फैसला
अदालत ने आदेश दिया कि 6 हफ्तों के भीतर सभी ऐसे शिक्षक जिनकी सेवा 10 साल से अधिक हो चुकी है और जिनकी नियुक्ति SSA के तहत विधिवत चयन प्रक्रिया से हुई थी, उन्हें नियमित किया जाए।
यदि प्रशासन इस अवधि में आदेश जारी नहीं करता, तो ये शिक्षक स्वयं ही पक्का माने जाएंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह फैसला सभी SSA शिक्षकों पर समान रूप से लागू होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवाद दोबारा न उठें।