Solan, 20 November-:बघाट बैंक ने ऋण डिफॉल्टरों के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) पॉलिसी लागू कर दी है। इस नई व्यवस्था के तहत डिफॉल्टरों को ब्याज में छूट मिलेगी, जबकि मूलधन का पूरा भुगतान अनिवार्य होगा। बैंक का मानना है कि नई नीति से ऋण जमा करवाने की प्रक्रिया आसान होगी और डिफॉल्टरों को आर्थिक राहत भी मिलेगी।
जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले बैंक प्रबंधन ने ऋण पुनर्भुगतान की स्थिति का विश्लेषण कर ओटीएस पॉलिसी का प्रारूप तैयार किया था। इसमें सस्ती दरों पर ऋण निपटारे की सुविधा का प्रावधान है, जिससे बड़े पैमाने पर डिफॉल्टरों को आकर्षित करने की उम्मीद है। हाल ही में बैंक का एनपीए स्तर घटकर 138 से 129 पर आ गया है, जो रिकवरी में आ रही सुधारात्मक प्रवृत्ति को दर्शाता है।
गौरतलब है कि लगातार बढ़ते एनपीए और वित्तीय अनियमितताओं के चलते रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने बघाट बैंक पर कड़ी कार्रवाई की थी। इसके बाद रिकवरी संबंधी कदमों को और मजबूत किया गया, जिससे सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। सहायक पंजीयक कार्यालय द्वारा भी निरंतर नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कुछ मामलों का निपटारा कोर्ट में किया गया है। इसी कार्यालय ने बैंक को ओटीएस पॉलिसी लागू करने की सलाह दी थी, जिसके बाद बोर्ड ने इसे मंजूरी देकर लागू कर दिया है।बैंक के चेयरमैन और कार्यकारी प्रबंध निदेशक ने हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री से मुलाकात कर रिकवरी की प्रगति की जानकारी साझा की थी। इसके अलावा स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के अधिकारियों से भी विस्तृत बातचीत की गई है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि यदि रिकवरी इसी गति से बढ़ती रही तो आरबीआई से और राहत देने का अनुरोध करने की तैयारी की जाएगी।
वर्तमान में बैंक खातों की टैपिंग जारी है और खाता धारकों को केवल 10,000 रुपये तक की निकासी की अनुमति है, जिससे लगभग 77,000 ग्राहक प्रभावित हैं। कई लोगों का पैसा फंसा हुआ है और वे आरबीआई से जल्द राहत की उम्मीद कर रहे हैं।बघाट बैंक के चेयरमैन अरुण शर्मा ने पुष्टि की कि ओटीएस पॉलिसी प्रभावी हो गई है और आने वाले दिनों में डिफॉल्टर कम ब्याज दरों पर अपने ऋण का निपटारा कर सकेंगे, जिससे बैंक और ग्राहकों—दोनों को राहत मिलने की संभावना है।