नई दिल्ली | संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP30 में इस बार भारत की भूमिका बेहद प्रभावशाली दिख रही है। जीवाश्म ईंधन नीति, जलवायु वित्त और विकासशील देशों के गठजोड़ से जुड़े मुद्दों पर भारत वैश्विक बातचीत का अहम केंद्र बनकर उभरा है। इसी क्रम में भारत के पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने चीन, क्यूबा और ब्राजील के शीर्ष नेताओं से महत्वपूर्ण मुलाकातें कीं।
अमेज़न स्थित ब्राजील के शहर बेलेम में 10 से 21 नवंबर तक चल रहे इस सम्मेलन में 190 से अधिक देश शामिल हैं। 80 से ज्यादा देशों ने जीवाश्म ईंधन के चरणबद्ध अंत को लेकर एक स्पष्ट वैश्विक खाका तैयार करने की मांग उठाई है, जिससे यह मुद्दा COP30 का प्रमुख केंद्र बन गया है।
चीन और क्यूबा के साथ रणनीतिक चर्चा
भूपेंद्र यादव ने चीन के विशेष दूत लियू झेनमिन के साथ बैठक में एलएमडीसी (Like-Minded Developing Countries) समूह के समन्वय को मजबूत करने पर जोर दिया। बातचीत का मुख्य फोकस—
- पेरिस समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन
- विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त
- ऊर्जा संक्रमण में तकनीकी सहयोग
इसके बाद यादव ने क्यूबा के पर्यावरण मंत्री सी. अरमांडो रोड्रिगेज बतिस्ता से मुलाकात की। दोनों देशों ने सौर परियोजनाओं और नवीकरणीय ऊर्जा पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। क्यूबा पहले ही CDRI और ISA से जुड़ चुका है, और भारत वहां सौर परियोजनाओं के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला से उच्च स्तर की मुलाकात
COP30 के दौरान भूपेंद्र यादव और भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा से विशेष बैठक की। लगभग 20 मिनट चली इस महत्वपूर्ण बातचीत में
- जीवाश्म ईंधन के भविष्य
- वैश्विक करार की संभावनाओं
- विकासशील देशों की साझा रणनीति
पर गहन चर्चा हुई। सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रपति लूला जीवाश्म ईंधन पर एक व्यापक वैश्विक खाका को COP30 का अनौपचारिक ‘मुख्य एजेंडा’ बनाना चाहते हैं और इसके लिए एलएमडीसी देशों से समर्थन भी जुटा रहे हैं।