Shimla, Sanju-:विधानसभा के शीतकालीन सत्र में ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने गुरुवार को मीडिया से बातचीत के दौरान अपने हालिया बयान को लेकर उठे विवाद पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि उनके वक्तव्य को कांग्रेस सरकार और उसके नेताओं ने जानबूझकर तोड़-मरोड़कर इस तरह पेश किया है, मानो भाजपा ओपीएस को खत्म करने जा रही हो, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
जयराम ठाकुर ने सदन में कहा था कि यदि प्रदेश में भाजपा सरकार बनती है तो वह कांग्रेस सरकार द्वारा शुरुआती दिनों में लिए गए निर्णयों की समीक्षा करेगी। इसके तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं ने यह प्रचारित करना शुरू कर दिया कि भाजपा ओल्ड पेंशन स्कीम को भी वापस लेने की तैयारी में है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस मुद्दे को इस तरह उछाला गया कि कर्मचारियों और पेंशनर्स में असमंजस पैदा हो गया।तपोवन में दूसरे दिन की कार्यवाही के बाद मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में जयराम ठाकुर ने दो टूक कहा कि उनके बयान में कहीं भी ओपीएस का उल्लेख नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि “समीक्षा” शब्द का अर्थ किसी योजना को रद्द करना नहीं होता, बल्कि यह किसी निर्णय की प्रक्रिया और प्रभाव को समझने की एक जिम्मेदार पहल होती है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह कर्मचारी वर्ग को भड़काने और राजनीतिक लाभ उठाने के उद्देश्य से उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत कर रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा प्रतिशोध की राजनीति में विश्वास नहीं करती और न ही ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर पार्टी का कोई नकारात्मक रुख है। उन्होंने दोहराया कि भाजपा सरकार बनने पर भी कर्मचारियों के हितों के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि कांग्रेस पूरी तरह से राजनीतिक भ्रम फैलाने की रणनीति अपना रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि उनके बयान का आशय केवल कांग्रेस सरकार के शुरुआती फैसलों की समीक्षा करना था, न कि ओपीएस को बंद करने का संकेत देना।