कुरुक्षेत्र | अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 ने इस बार अपनी भव्यता और अंतरराष्ट्रीय पहचान दोनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। महोत्सव की आधिकारिक अवधि 5 दिसंबर तक है, लेकिन 24 नवंबर से शुरू हुए प्रमुख कार्यक्रम 1 दिसंबर को गीता पूजन और दीपोत्सव के साथ संपन्न हो गए। आठ दिनों तक धर्मनगरी कुरुक्षेत्र अध्यात्म, कला और संस्कृति के अद्वितीय संगम में डूबी रही।
58 देशों में गूंजी गीता की संदेशधारा
इस वर्ष गीता महोत्सव की वैश्विक गूंज अभूतपूर्व रही। लगभग 58 देशों में कार्यक्रम आयोजित हुए और दुनिया भर में गीता का संदेश व्यापक रूप से पहुंचा। विभिन्न देशों के दूतावासों में भी महोत्सव से जुड़े आयोजन हुए, जिससे यह वास्तव में ‘ग्लोबल फेस्टिवल’ बन गया।
महोत्सव की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला विशेष वीआईपी आगमन
महोत्सव इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक बना, जिसमें देश के शीर्ष नेतृत्व ने भाग लेकर इसकी प्रतिष्ठा बढ़ाई।
मुख्य अतिथि और प्रमुख हस्तियां
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी – 25 नवंबर को ब्रह्मसरोवर पहुंचे, पूजन किया और महाआरती की।
- उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन – 30 नवंबर को देव स्थानम सम्मेलन में शामिल, धर्मनगरी में पहली बार आगमन।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह – 24 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन में उपस्थित।
- पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल – 29 नवंबर को विराट संत सम्मेलन में शामिल।
- उत्तराखंड CM पुष्कर सिंह धामी – विराट संत सम्मेलन के विशेष अतिथि।
- योगगुरु बाबा रामदेव – 1 दिसंबर को वैश्विक गीता पाठ में शामिल।
मुख्यमंत्री नायब सैनी भी छह बार और प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली दो बार महोत्सव स्थल पहुंचे।
इस बार पहली बार हुए कई ऐतिहासिक आयोजन
अंतरराष्ट्रीय स्वरूप और विस्तारीकरण
- 16 देशों के 25 स्कॉलर अंतरराष्ट्रीय गीता सम्मेलन (24–26 नवंबर) में शामिल।
- फिजी और त्रिनिदाद के 20 वैदिक पंडितों की विशेष उपस्थिति।
- विभिन्न देशों के दूतावासों में गीता से जुड़े कार्यक्रम।
विशेष कार्यक्रम और रिकॉर्ड
- 21,000 स्कूली छात्रों ने एक साथ वैश्विक गीता पाठ किया।
- नगर की 18 सामाजिक संस्थाओं ने गीता के 18 अध्यायों पर आधारित शोभायात्रा निकाली।
- महोत्सव का सरस व शिल्प मेला पहली बार 21 दिनों के लिए आयोजित।
- 22 से अधिक राज्यों और 6 देशों के शिल्पकारों ने प्रदर्शनी लगाई।
- देशभर के प्रमुख मंदिरों – जैसे जगन्नाथ मंदिर (ओडिशा), महाकालेश्वर (उज्जैन), बांके बिहारी (वृंदावन), कृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) – से महोत्सव का लाइव प्रसारण।
- 64 देवस्थान के प्रतिनिधि देव स्थानम सम्मेलन में पहुंचे।
भक्ति और कला का संगम: बड़े कलाकारों की प्रस्तुति
महोत्सव में विभिन्न प्रसिद्ध कलाकारों और भजन गायकों ने अपनी प्रस्तुति से समा बांधा—
- 24 नवंबर – पद्मिनी कोल्हापुरी
- 26 नवंबर – पुनीत इस्सर (दुर्योधन, महाभारत)
- 27 नवंबर – सुरेश वाडेकर
- 29 नवंबर – डॉ. हरिओम पंवार
- 30 नवंबर – साध्वी पूर्णिमा
- 1 दिसंबर – अनूप जलोटा
“इस बार महोत्सव अपने सर्वोच्च स्तर पर”: केडीबी
केडीबी के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल ने बताया कि इस बार महोत्सव ने अंतरराष्ट्रीय पहचान के नए मानक स्थापित किए। उन्होंने कहा— “यह प्रदेश और केंद्र सरकार के प्रयासों का परिणाम है। अगले वर्ष गीता महोत्सव को और भी व्यापक एवं वैश्विक स्तर पर आयोजित करने की योजना अभी से तैयार की जा रही है।”