Shimla, Sanju-:हिमाचल प्रदेश में नशे के विरुद्ध चल रही जंग दिन-प्रतिदिन तेज होती जा रही है। सरकारी प्रयासों के साथ-साथ अब सामाजिक संगठन भी इस अभियान को जन आंदोलन का स्वरूप देने में जुट गए हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत प्रदेश के 17 गैर सरकारी संगठनों ने ‘संजीवनी’ के बैनर तले एकजुट होकर शिमला में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का शुभारंभ प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए राज्यपाल शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आग्रह पर उन्होंने नशे के खिलाफ अपनी मुहिम शुरू की थी, और अब यह अभियान जनता के सहयोग से एक व्यापक आंदोलन का रूप ले रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि नशे के विरुद्ध लड़ाई में सरकार और विपक्ष दोनों समान विचार के साथ आगे आए हैं, जिससे इस अभियान को और मजबूती मिली है।राज्यपाल ने कहा कि नशे की समस्या केवल कानून से नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता से समाप्त होगी। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि अपने घर, परिवार और समाज में जागरूकता फैलाकर युवाओं को नशे से दूर रखने के प्रयास किए जाएं। राज्यपाल ने “यस टू लाइफ—नो टू ड्रग्स” का नारा देते हुए युवाओं से जीवन-पथ चुनने की अपील की।
पुलिस की भूमिका का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने में पुलिस की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट रूप से चेताया कि यदि कोई पुलिसकर्मी नशा तस्करों का साथ देते हुए पकड़ा जाता है, तो ऐसे लोगों को तुरंत फोर्स से बाहर किया जाना चाहिए।राज्यपाल ने कहा कि कठोर कानून बनाने भर से नशा समाप्त नहीं होगा। इसके लिए आवश्यक है कि प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर समाज को जागरूक करने में योगदान दे और युवाओं को स्वस्थ भविष्य की ओर अग्रसर करे।