चंडीगढ़। जननायक जनता पार्टी (जजपा) के आठवें स्थापना दिवस के बाद हरियाणा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जींद के जुलाना में हुई बड़ी रैली के केवल दो दिन बाद ही राज्य सरकार ने जजपा नेताओं की सुरक्षा वापस लेना शुरू कर दिया है। बुधवार को करीब आधा दर्जन नेताओं की सुरक्षा हटाने का फैसला लिया गया, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराज़गी का माहौल है।
सूत्रों के अनुसार, जिन नेताओं की सुरक्षा हटाई गई है, उनमें कुछ को पहले जान से मारने की धमकियां मिल चुकी थीं और उन पर हमले तक हुए थे, जिसके बाद उन्हें Y और Z श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी। अब सुरक्षा वापस लेने के निर्णय के पीछे कई राजनीतिक कारणों की चर्चा हो रही है।
माना जा रहा है कि यह कदम जजपा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला द्वारा कार्यवाहक डीजीपी ओपी सिंह के बयान पर उठाए गए सवालों के बाद सामने आया है। डीजीपी ने हाल ही में कहा था कि “थार और बुलेट पर चलने वालों का दिमाग सटका हुआ होता है।” इसके जवाब में दुष्यंत चौटाला ने केंद्रीय नेताओं की बुलेट और थार पर बैठी हुई तस्वीरें पोस्ट करते हुए पूछा था कि फिर इनके बारे में क्या राय होगी? जुलाना रैली में भी दुष्यंत चौटाला थार में बैठकर पहुंचे थे, जिसे एक महिला कार्यकर्ता चला रही थी।
बुधवार को जिन नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमें जजपा यूथ विंग अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला, दुष्यंत चौटाला के ससुर और पूर्व एडीजीपी परमजीत सिंह अहलावत, गायक और गुरुग्राम से लोकसभा प्रत्याशी रह चुके राहुल फाजिलपुरिया तथा सोहना से चुनाव लड़ चुके विनेश गुर्जर शामिल हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में हुई फायरिंग की घटना के बाद राहुल फाजिलपुरिया की सुरक्षा को लेकर जजपा ने सरकार से शिकायत भी की थी।
उधर, पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा हटाने का निर्णय एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है और खतरे के स्तर की समीक्षा के बाद ही यह कदम उठाया गया है। हालांकि जजपा नेताओं ने इस मामले पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जजपा नेताओं की सुरक्षा में की गई कटौती ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। स्थापना दिवस रैली की भव्यता और बढ़ते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह फैसला आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक विवाद खड़ा कर सकता है।