नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मैरिटल रेप को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि भारत में पत्नी की इच्छा के विरुद्ध बनाए गए शारीरिक संबंध को गंभीरता से नहीं लिया जाता, जबकि यह स्पष्ट रूप से बलात्कार और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की श्रेणी में आता है।
प्रभा खैतान फाउंडेशन और FICCI लेडीज़ ऑर्गनाइजेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए थरूर ने कहा कि भारत उन कुछ लोकतांत्रिक देशों में शामिल है, जहां वैवाहिक बलात्कार को अब भी अपराध के रूप में मान्यता नहीं दी गई है, जबकि देश में सख्त एंटी-रेप कानून मौजूद हैं।
थरूर का सवाल : पति को कानून में छूट क्यों?
थरूर ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि भारत में पति द्वारा पत्नी के साथ जबरदस्ती को समान गंभीरता नहीं दी जाती। उन्होंने पूछा, “जब विवाह में सम्मान और सहमति दोनों आवश्यक हैं, तो शादी के नाम पर जबरन संबंध को अपराध क्यों नहीं माना जाता? पतियों को कानून से छूट क्यों?”
उनका कहना था कि शादी के भीतर की हिंसा भी उतनी ही गंभीर है जितनी बाहर की, और इसे “विवाहित कर्तव्य” या “पवित्र बंधन” कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मजबूत एंटी-रेप कानून, लेकिन मैरिटल रेप पर चुप्पी
थरूर ने कहा कि भारत में कठोर बलात्कार विरोधी कानून मौजूद हैं, लेकिन इन्हीं कानूनों में पतियों के लिए एक “अपवाद” है। उन्होंने कहा कि यह धारणा पुरानी है कि विवाह एक ऐसा पवित्र संबंध है जिसमें होने वाली हर चीज को वैवाहिक कर्तव्य मान लिया जाता है।
थरूर के अनुसार, यह सोच महिलाओं के अधिकारों को सीमित करती है और घरेलू हिंसा के कई मामलों को हल्के में लेने की ओर धकेलती है।
अलग रहने पर भी जबरदस्ती,कानून में कमियां उजागर
थरूर ने उदाहरण देते हुए बताया कि कई दंपति अलग रहते हैं, लेकिन कानूनी रूप से तलाकशुदा नहीं होते। ऐसे मामलों में भी पति जब चाहें पत्नी के साथ जबरदस्ती करते हैं और कानून उन्हें सजा नहीं दे पाता क्योंकि कागज़ों पर वे अभी भी पति-पत्नी हैं।
थरूर ने इसे “न्याय का अपमान” बताते हुए कहा कि मैरिटल रेप को किसी भी परिस्थिति में “विवाहित प्रेम” का हिस्सा नहीं माना जा सकता, “यह हिंसा है, और हमें महिलाओं के अधिकारों के लिए खड़ा होना चाहिए।”