चंडीगढ़। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद कुमारी सैलजा ने लोकसभा में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करनाल और फरीदाबाद में चल रही परियोजनाओं की धीमी प्रगति को लेकर केंद्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत इन दोनों शहरों में 577 करोड़ रुपये की 22 परियोजनाएं अब तक पूरी नहीं हो पाई हैं, जबकि इन्हें तय समयसीमा के भीतर पूरा किया जाना था।
सैलजा के सवाल के जवाब में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री टोक्हान साहू ने सदन को बताया कि करनाल और फरीदाबाद में कुल 161 परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं। इनमें से 139 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष 22 परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं। इन सभी परियोजनाओं पर कुल 2136 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, जिसमें से अब तक 1559 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि दोनों शहरों ने मिलकर 980 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता का दावा किया था, जिसमें से 921 करोड़ रुपये का उपयोग किया जा चुका है। शेष परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 577 करोड़ रुपये है, जिन्हें पूरा करने के लिए संबंधित कंपनियों को दिसंबर तक हर हाल में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
विस्तृत आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि करनाल में 117 परियोजनाएं स्वीकृत थीं, जिनमें से 105 परियोजनाएं (801 करोड़ रुपये) पूरी हो चुकी हैं, जबकि 12 परियोजनाएं (406 करोड़ रुपये) अभी लंबित हैं। इसके अलावा करनाल स्मार्ट सिटी मिशन के तहत मिलने वाली 59 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता का उपयोग अभी तक नहीं कर पाया है।
फरीदाबाद की स्थिति पर बात करते हुए बताया गया कि यहां 44 में से 34 परियोजनाएं (758 करोड़ रुपये) पूरी की जा चुकी हैं, जबकि 10 परियोजनाएं (171 करोड़ रुपये) अब भी निर्माणाधीन हैं।
सांसद कुमारी सैलजा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन का उद्देश्य केवल फंड जारी करना नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की नीतियों के चलते यह महत्वाकांक्षी योजना अधूरे प्रोजेक्ट्स और देरी की भेंट चढ़ती जा रही है। सैलजा ने केंद्र सरकार से पूछा कि इतनी देरी के बावजूद परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयसीमा सुनिश्चित करने के लिए आखिर कौन से ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।