Shimla, 15 December-:हिमाचल प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आ सकती है। वर्ष 2026-27 की शुरुआत यानी 1 अप्रैल 2026 से राज्य में बिजली दरें मौजूदा स्तर पर बनी रह सकती हैं या इनमें और कमी संभव है। इसकी बड़ी वजह राज्य बिजली बोर्ड द्वारा अपनाई गई नई वित्तीय रणनीति और लागत नियंत्रण के उपाय हैं।
बिजली बोर्ड ने हाल के महीनों में महंगे कर्ज से बाहर निकलकर सस्ते ऋण की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। इससे ब्याज भुगतान का बोझ कम हुआ है, जिसका सीधा फायदा टैरिफ निर्धारण में मिल सकता है। इसके साथ ही ट्रांसमिशन खर्च में कमी और आउटसोर्स भर्ती के कारण कर्मचारियों पर होने वाला व्यय भी घटा है। हालांकि दूसरी ओर बोर्ड की पेंशन देनदारी लगातार बढ़ती जा रही है, जो एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।अगले वित्त वर्ष के लिए बिजली दरें तय करने को लेकर बोर्ड ने 29 नवंबर को राज्य विद्युत नियामक आयोग में याचिका दाखिल कर दी है। आयोग को 31 मार्च 2026 से पहले इस पर फैसला लेना है। याचिका दायर होने से पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्वयं इस पूरे मामले की समीक्षा की थी। सरकार का रुख साफ है कि आगामी वित्त वर्ष में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न डाला जाए। सब्सिडी को लेकर अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा।
प्रदेश में करीब 28 लाख घरेलू और लगभग दो लाख व्यावसायिक बिजली उपभोक्ता हैं। मौजूदा व्यवस्था के तहत 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त है, जबकि 126 से 300 यूनिट तक 5.90 रुपये और उससे ऊपर 6.76 रुपये प्रति यूनिट दर लागू है। फिलहाल संकेत हैं कि ये दरें बरकरार रह सकती हैं या इनमें और कटौती हो सकती है।बिजली बोर्ड की वित्तीय तस्वीर पर नजर डालें तो कर्मचारियों की तुलना में पेंशन पर खर्च कहीं अधिक है। जहां करीब 13 हजार नियमित कर्मचारी हैं, वहीं पेंशनरों की संख्या 30 हजार के आसपास पहुंच चुकी है। सालाना वेतन खर्च लगभग 900 करोड़ रुपये है, जबकि पेंशन पर करीब 2000 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।इसके अलावा बिजली बोर्ड जितनी बिजली बेचता है, उससे अधिक खरीद भी रहा है। यही कारण है कि लागत संतुलन बनाए रखना बोर्ड और सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। बावजूद इसके, उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिशें तेज होती दिख रही हैं।